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लेबनान से शुरू होगा ईरान-अमेरिका का भयंकर युद्ध! भारत के लिए क्यों है यह 'खतरे की घंटी'?

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Iran US War Alert
Iran US War Alert: दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है। लेबनान के मोर्चे पर बढ़ती हलचल ने संकेत दे दिए हैं कि अब संघर्ष केवल इजराइल और हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं रहा। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव का 'काउंटडाउन' शुरू हो चुका है। लेबनान अब एक देश नहीं, बल्कि दो महाशक्तियों के टकराने का 'लॉन्च पैड' बन गया है।

1. लेबनान : जहां से शुरू होगी 'तबाही की पटकथा'

लेबनान की सीमा पर इजराइली टैंकों की गर्जना के बीच अमेरिकी नौसेना का USS Abraham Lincoln स्ट्राइक ग्रुप भूमध्य सागर में तैनात है। रणनीतिकारों का मानना है कि अगर ईरान ने हिजबुल्लाह के समर्थन में यदि इजराइल पर कोई भी सीधा कदम उठाया, तो वॉशिंगटन की मिसाइलें तेहरान की ओर मुड़ सकती हैं।
 

2. ईरान की 'रिंग ऑफ फायर' रणनीति

ईरान ने इजराइल के चारों ओर अपनी 'रिंग ऑफ फायर' (Proxy groups) को एक्टिव कर दिया है।
  • हिजबुल्लाह (लेबनान) : सबसे घातक हथियार।
  • हूती (यमन) : लाल सागर में सप्लाई चेन ठप करने की तैयारी।
  • मिलिशिया (इराक/सीरिया) : अमेरिकी ठिकानों पर हमले।
एक्सपर्ट बताते है कि यह अब 'प्रॉक्सी वॉर' नहीं रहा। अमेरिका का लेबनान के करीब आना और ईरान का परमाणु धमकियां देना  बताता है कि रेड लाइन क्रॉस हो चुकी है।
 

भारत के लिए क्यों है यह 'खतरे की घंटी'?

अगर लेबनान से शुरू होकर यह युद्ध ईरान और अमेरिका के बीच फैलता है, तो इसका असर सीधे आपकी जेब पर होगा:
 
1. 'एनर्जी सिक्योरिटी' पर सीधा हमला : भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता है।
 
सप्लाई चेन में रुकावट : यदि यह युद्ध लेबनान और ईरान तक फैलता है, तो 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of  Hormuz) के बंद होने का खतरा बढ़ जाएगा, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है।
 
महंगाई का विस्फोट : कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का मतलब है भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना, जिससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा और सीधा असर आपकी रसोई के बजट पर पड़ेगा।
 
2. 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा का सवाल : खाड़ी देशों (Gulf Countries) में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं और काम करते हैं।
 
रेमिटेंस (Remittance) पर असर : ये भारतीय हर साल अरबों डॉलर भारत भेजते हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा और वहां से मिलने वाले विदेशी मुद्रा भंडार पर गहरा संकट मंडराएगा।
 
इवेकुएशन की चुनौती : अगर युद्ध बड़े स्तर पर फैला, तो भारत को 'ऑपरेशन अजय' जैसे बड़े रेस्क्यू मिशन चलाने पड़ेंगे, जो एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती होगी।
 
3. 'IMEC' प्रोजेक्ट पर ग्रहण : भारत ने हाल ही में India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) की योजना बनाई थी, जो भारत को सीधे यूरोप से जोड़ने वाला था।
 
इजराइल और लेबनान के बीच युद्ध इस पूरे कॉरिडोर के रास्ते को 'वॉर ज़ोन' में तब्दील कर देगा, जिससे करोड़ों का निवेश और  भविष्य का व्यापार अधर में लटक सकता है।
 
4. शेयर बाजार और विदेशी निवेश : युद्ध की आहट मात्र से ही शेयर बाजार में 'Panic Selling' शुरू हो जाती है। विदेशी निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों (जैसे सोना या अमेरिकी डॉलर) में लगाने लगते हैं। इससे रुपया कमजोर होगा और भारतीय निवेशकों की संपत्ति घट सकती है।

क्या टल सकता है महायुद्ध?

जहां एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ लेबनान के आसमान में उड़ते लड़ाकू विमान कुछ और ही कहानी बयां  कर रहे हैं। क्या दुनिया एक और विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रही है? या फिर यह केवल 'माइंड गेम्स' का हिस्सा है?
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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