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क्या भारत में लगने वाला है 'एनर्जी लॉकडाउन'! मोदी की 7 अपीलों के पीछे की पूरी कहानी

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Energy Lockdown
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को हैदराबाद में भाजपा की रैली के दौरान देशवासियों से 7 महत्वपूर्ण अपीलें की हैं। इनमें सोना न खरीदने, पेट्रोल-डीजल बचाने, वर्क फ्रॉम होम करने और विदेश यात्राएं टालने जैसी बातें शामिल हैं। सोशल मीडिया पर इसे 'एनर्जी लॉकडाउन' का नाम दिया जा रहा है।

पीएम मोदी की प्रमुख अपीलें

एक साल तक सोना न खरीदें : घर में कोई भी कार्यक्रम हो, सोने के गहने न खरीदें।
पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल : मेट्रो का ज्यादा उपयोग, कारपूलिंग, सामान रेलवे से भेजें।
वर्क फ्रॉम होम : ऑनलाइन मीटिंग्स और वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को प्राथमिकता दें।
खाने का तेल : खाने के तेल का 10% कम उपयोग। 
केमिकल खाद आधी करें : नेचुरल फार्मिंग की ओर बढ़ें।
विदेश यात्राएं टालें : डेस्टिनेशन वेडिंग और वैकेशन स्थगित करें।
स्वदेशी अपनाएं : मेड इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा दें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 घंटे में दूसरी बार भारतीय नागरिकों से अपील की। उन्होंने अपनी अपनी में कहा कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। पीएम मोदी ने वड़ोदरा रैली में यह अपील नागरिकों से की।

अपील के पीछे असली वजह क्या है?

मुख्य वजह अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में तनाव है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है, जिस रास्ते से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 70% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें आधा इसी रास्ते से आता है।

27 फरवरी को कच्चे तेल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 11 मई तक 103.78 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई (लगभग 50% बढ़ोतरी)। भारत ने अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, जिससे तेल कंपनियों को रोज 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कच्चे तेल का इम्पोर्ट बिल 17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। 
सोने का मामला : भारत 99% सोना आयात करता है। 2025-26 में सोने का इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये था। बढ़ती कीमतों (1.52 लाख डॉलर प्रति किलो) के कारण विदेशी मुद्रा का भारी बहाव हो रहा है।  सोने की कीमत 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो पहुंच गई है। जनवरी में 100 टन, फरवरी में 65 टन और मार्च में मात्र 22 टन सोना आयात हुआ। अप्रैल में यह और कम होने का अनुमान है।

अन्य आयात :  खाने का तेल, उर्वरक (25-30% यूरिया, 90% DAP और 100% पोटाश आयात) भी विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा खर्च करते हैं। इन चार वस्तुओं (क्रूड ऑयल, गोल्ड, वेजिटेबल ऑयल और फर्टिलाइजर) का कुल आयात बिल FY26 में 240.7 बिलियन डॉलर रहा, जो देश के कुल आयात का 31% है।

क्या 'एनर्जी लॉकडाउन' जैसी स्थिति है?

सरकार ने कोई औपचारिक लॉकडाउन घोषित नहीं किया है। पीएम मोदी कोविड काल की तरह स्वैच्छिक संयम की अपील कर रहे हैं।

उद्देश्य है:
  • विदेशी मुद्रा भंडार बचाना
  • रुपया स्थिर रखना
  • महंगाई पर काबू रखना
  • इम्पोर्ट बिल घटाना
 
एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक अगर हर नागरिक थोड़ा-थोड़ा योगदान दे तो देश इस वैश्विक संकट से बेहतर तरीके से निपट सकता है।

एनर्जी लॉकडाउन सरकार द्वारा घोषित कोई आधिकारिक शब्द नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा संरक्षण और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए की गई स्वैच्छिक अपीलों (जैसे मेट्रो का उपयोग, कार पूलिंग, विदेश यात्रा टालना) का एक विश्लेषणात्मक निष्कर्ष है।

त्याग केवल जनता ही क्यों करें, नेताओं और मंत्रियों क्यों नहीं 

प्रधानमंत्री की इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए नागरिकों के एक बड़े समूह ने "जय हिंद, जय भारत" के संकल्प के साथ साथ समर्थन तो जताया है, लेकिन बदले में तंत्र से कुछ ठोस वादे मांगे हैं-
 
1. मंत्रियों और 'बाबुओं' की फिजूलखर्ची पर रोक
जनता का तर्क है कि यदि आम आदमी बस और ट्रेन से सफर करे, तो मंत्री और अधिकारी विशाल काफिलों (Huge Convoys) में क्यों चलें? मांग की गई है कि केंद्र और राज्य के सभी वीआईपी और नौकरशाह भी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर उदाहरण पेश करें।
2. काले धन के 'सोने' पर प्रहार
प्रधानमंत्री ने आम जनता से सोना न खरीदने को कहा है, लेकिन जनता का कहना है कि राजनेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और रसूखदारों ने काले धन को सोने के रूप में छिपा रखा है। जनता की मांग है कि सरकार इन "बड़े खिलाड़ियों" के गुप्त भंडार पर सर्जिकल स्ट्राइक करे, न कि केवल आम आदमी के निवेश पर रोक लगाए।
3. 'नेपो किड्स' की घर वापसी
एक ओर पीएम ने विदेश यात्रा टालने को कहा है, वहीं जनता ने सवाल उठाया है कि नेताओं और नौकरशाहों के बच्चे (Nepo Kids) विदेशों में क्यों पढ़ रहे हैं? मांग की गई है कि इन बच्चों को वापस बुलाकर भारतीय संस्थानों में पढ़ाया जाए, ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था पर उनका भरोसा दिखे और कीमती विदेशी मुद्रा बचे।
4. 'रेवड़ी संस्कृति' (Freebies) का अंत
सबसे तीखी मांग 'लाडली बहना' और 'फ्री एलपीजी' जैसी लोकलुभावन योजनाओं को लेकर है। नागरिकों का कहना है कि जब देश युद्ध जैसी परिस्थिति से लड़ रहा है, तो 'मुफ्त की रेवड़ियां' तुरंत बंद होनी चाहिए। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए टैक्स के पैसे का उपयोग बुनियादी ढांचे पर हो, न कि चुनावी लाभ के लिए मुफ्त वितरण पर।

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