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ISRO को मिली एक और बड़ी कामयाबी, Drogue Parachute सिस्टम रहा सफल

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हमें फॉलो करें ISRO achieves another success for Gaganyaan mission

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, शनिवार, 20 दिसंबर 2025 (23:10 IST)
Indian Space Research Organisation News : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के लिए एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इसरो के गगनयान चालक दल मॉड्यूल के वास्ते गति-मंदन प्रणाली विकसित करने के लिए ड्रोग पैराशूट का श्रृंखलाबद्ध मानक परीक्षण सफल रहा है। ISRO ने ड्रोग पैराशूट के क्वालिफिकेशन परीक्षणों की सीरीज सफलतापूर्वक पूरी कर ली। ये परीक्षण गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम के विकास के लिए आयोजित किए गए थे, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। गगनयान मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा, जो स्वतंत्र रूप से मानव को अंतरिक्ष में भेज सकते हैं।

खबरों के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के लिए एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इसरो के गगनयान चालक दल मॉड्यूल के वास्ते गति-मंदन प्रणाली विकसित करने के लिए ड्रोग पैराशूट का श्रृंखलाबद्ध मानक परीक्षण सफल रहा है। ISRO ने ड्रोग पैराशूट के क्वालिफिकेशन परीक्षणों की सीरीज सफलतापूर्वक पूरी कर ली।
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ये परीक्षण गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम के विकास के लिए आयोजित किए गए थे, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। खबरों के मुताबिक, ये परीक्षण चंडीगढ़ में टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (आरटीआरएस) इकाई में पूरे किए गए। गगनयान क्रू मॉड्यूल के गति-मंदन प्रणाली में 4 तरह के कुल 10 पैराशूट शामिल हैं।

लैंडिंग सीक्वेंस की शुरुआत एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट से होती है, जो पैराशूट कंपार्टमेंट का कवर हटाते हैं। इसके बाद ड्रोग पैराशूट तैनात होते हैं, जो री-एंट्री के दौरान उच्च गति पर मॉड्यूल को स्थिर करते हैं और गति कम करते हैं। ड्रोग पैराशूट रिलीज होने पर पायलट पैराशूट सक्रिय होते हैं, जो मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं। अंत में मुख्य पैराशूट मॉड्यूल की गति को इतना धीमा कर देते हैं, जिससे कि समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग संभव हो सके।
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गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसमें 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा में जाएंगे और सुरक्षित लौटेंगे। गगनयान मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा, जो स्वतंत्र रूप से मानव को अंतरिक्ष में भेज सकते हैं।
Edited By : Chetan Gour 

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