Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 (14:00 IST)
Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 (14:15 IST)
Veera Gangadhara Swami Nonavinakere: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar oath ceremony) ने संविधान हाथ में लेकर अपने आध्यात्मिक गुरु 'गंगाधरा अज्जा' के नाम पर सीएम पद की शपथ ली। शपथ लेने के पहले उन्होंने मंच पर गुरु गंगाधर अज्जा की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और वहां मौजूद जनता का अभिवादन किया। सबसे खास बात यह है कि शिवकुमार राज्य के वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जबकि उनके आध्यात्मिक गुरु वीर शैव- लिंगायत परंपरा से आते हैं।
कौन हैं गंगाधरा स्वामी?
श्री वीर गंगाधरा स्वामीजी, जिन्हें उनके अनुयायी श्रद्धा से 'गंगाधरा अज्जा' (Gangadhara Ajja) या 'नोनाविनकेरे अज्जा' (Nonavinakere Ajja) कहते हैं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के परम आध्यात्मिक गुरु हैं। शिवकुमार के जीवन और उनके राजनीतिक करियर में गंगाधरा अज्जा का स्थान बेहद ऊंचा है। डीके शिवकुमार उन्हें अपना भगवान और मार्गदर्शक मानते हैं।
राजनीति या निजी जीवन में कोई भी बड़ा फैसला लेने, चुनाव का नामांकन भरने या किसी संकट में फंसने पर शिवकुमार हमेशा आशीर्वाद लेने नोनाविनकेरे जाते रहे हैं। शिवकुमार का मानना है कि उनके जीवन के सबसे कठिन दौर (जैसे कानूनी मुश्किलें या राजनीतिक संघर्ष) में गुरु के आशीर्वाद और उनकी दिखाई राह ने ही उन्हें शक्ति दी। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले भी शिवकुमार ने मंच पर सबसे पहले गंगाधरा अज्जा की तस्वीर के सामने सिर झुकाया, पुष्पांजलि अर्पित की और फिर उन्हीं के नाम पर पद और गोपनीयता की शपथ ली।
लिंगायत परंपरा से जुड़ा है मठ
नोनाविनकेरे अज्जा (जिन्हें श्री वीर गंगाधरा स्वामीजी या 'अज्जय्या' के नाम से भी जाना जाता है) कर्नाटक के तुमकुरु जिले के नोनाविनकेरे में स्थित काडसिद्धेश्वर मठ (Kadasiddeshwara Mutt) के एक बेहद श्रद्धेय और ऐतिहासिक संत थे। वर्तमान में इस आध्यात्मिक गद्दी और परंपरा का संचालन डॉ. करिवृषभ देशिकेंद्र शिवयोगीश्वर स्वामीजी कर रहे हैं। उन्हें भी भक्त आदर से अज्जय्या कहकर ही बुलाते हैं।
यह पीठ तुमकुरु (Tumakuru) जिले के तिप्तूर तालुक के नोनाविनकेरे में स्थित है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत समृद्ध माना जाता है। यह मठ वीरशैव-लिंगायत परंपरा से जुड़ा हुआ है। यह सामाजिक कल्याण, आध्यात्मिक शिक्षा और जनसेवा के लिए जाना जाता है।
भविष्यवाणी और विश्वास
मठ के संतों ने पहले ही भविष्यवाणी की थी कि डीके शिवकुमार के जीवन में मुख्यमंत्री बनने का योग आएगा। शिवकुमार का मानना है कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, वह इसी आध्यात्मिक आशीर्वाद की वजह से है। जब डीके शिवकुमार जेल में थे या ईडी-आईटी की कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे थे, तब वे मानसिक शांति और शक्ति के लिए लगातार इस मठ के संपर्क में रहे।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले, जब राजनीतिक गलियारों में तमाम चर्चाएं चल रही थीं, तब नोनाविनकेरे अज्जा (स्वामीजी) ने ही शिवकुमार को कड़ा निर्देश दिया था कि 'बात करोगे तो मोती टूट जाएगा, काम बिगड़ जाएगा।' उनके इस आदेश के बाद शिवकुमार और उनके समर्थकों ने पूरी तरह चुप्पी साध ली थी, जिसका उन्हें राजनीतिक लाभ मिला।
CMO में स्वामीजी की विशेष पूजा-अर्चना
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने से ठीक पहले नोनाविनकेरे के स्वामीजी खुद बेंगलुरु स्थित 'विधानसौध' (कर्नाटक विधानसभा भवन) पहुंचे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) और वहां की कुर्सी की विशेष पूजा-अर्चना की और पूरे परिसर में पवित्र अक्षत छिड़क कर शुद्धिकरण किया।
मुख्यमंत्री कार्यालय में डीके शिवकुमार की कुर्सी को पूर्व दिशा की ओर मुख करके रखा गया है और वास्तु विशेषज्ञ व स्वामीजी के निर्देशानुसार कार्यालय में 'अज्जय्या' की एक बड़ी तस्वीर भी स्थापित की गई है। नोनाविनकेरे मठ के संतों को कर्नाटक में चमत्कारी और त्रिकालदर्शी (भविष्य देखने वाले) के रूप में देखा जाता है, यही वजह है कि न केवल डीके शिवकुमार बल्कि राज्य के कई अन्य बड़े नेता भी वहां माथा टेकने जाते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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