Mamata Banerjee has approached Supreme Court against SIR : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ आधिकारिक बैठक से ठीक 24 घंटे पहले बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए चुनाव आयोग व बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। मामले पर इसी सप्ताह सुनवाई की संभावना है। बनर्जी ने साफ किया कि वह कमीशन के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही वह कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगी। वहीं विपक्षी भाजपा ने उनके इस कदम को राजनीतिक ड्रामा बताकर खारिज कर दिया है।
खबरों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ आधिकारिक बैठक से ठीक 24 घंटे पहले बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए चुनाव आयोग व बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया है।
मामले पर इसी सप्ताह सुनवाई की संभावना है। सोमवार को ममता बनर्जी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग की पूरी बेंच के साथ निर्वाचन आयोग में एक बैठक में शामिल होंगी, हालांकि रविवार को कोर्ट की छुट्टी के दिन वह खुद सुप्रीम कोर्ट गईं और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति से जुड़े आयोग के एक्शन को चुनौती दी।
ममता ने आरोप लगाया है कि मानवीय पहलुओं की उपेक्षा व नियम-कानूनों का उल्लंघन करके बंगाल के लोगों पर जबरन एसआईआर थोपा जा रहा है। ममता एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को 6 बार पत्र भी लिख चुकी हैं। रविवार को दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले बनर्जी ने कोलकाता एयरपोर्ट पर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि इस गलत प्रक्रिया ने आम लोगों में डर का माहौल बना दिया है, जैसा कि एनआरसी की प्रक्रिया के दौरान डर पैदा हुआ था।
ममता शुरू से ही एसआईआर का पुरजोर विरोध कर रही हैं। वे इसके विरुद्ध कोलकाता में सड़क पर भी उतर चुकी हैं। कानूनी और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि याचिका का समय चुनाव आयोग के साथ उनकी तय बैठक से ठीक पहले एक सोची-समझी रणनीति है। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा और महाराष्ट्र में इसी तरह के चुनावी तरीकों से भाजपा को वहां चुनाव जीतने में मदद मिली।
बनर्जी ने साफ किया कि वह कमीशन के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही वह कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगी। वहीं विपक्षी भाजपा ने उनके इस कदम को राजनीतिक ड्रामा बताकर खारिज कर दिया है। भाजपा नेता सजल घोष ने कहा, उन्होंने रविवार को केस फाइल किया और सोमवार को अपॉइंटमेंट है। इसका क्या मतलब है? यह पूरी तरह प्रचार के लिए ड्रामा है।
एक और भाजपा नेता और वकील, देबाजीत सरकार ने कहा कि बनर्जी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कमीशन और ईवीएम को दोष देने के लिए एक कहानी तैयार कर रही हैं। मालूम हो कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ में आगामी बुधवार को बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामलों पर सुनवाई होनी हैं।
Edited By : Chetan Gour