वाराणसी में देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनाए गए मणिकर्णिका घाट के हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया है। इस दौरान देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाया गया। यहां पुनर्विकास के नाम पर देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को गिरा दिया गया हैं, जिसके बाद इंदौर में इसे लेकर भारी आक्रोश है। लोग इस ऐतिहासिक धरोहर का अपमान बता रहे हैं। इंदौर में अहिल्याबाई को माता का दर्जा दिया गया है, जिसके यहां जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। खासतौर से मराठी समुदाय में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है।
कौन थी देवी अहिल्याबाई होलकर : देवी अहिल्याबाई होलकर राजवंश की तीसरी शासिका थीं, जिनका कार्यकाल 28 वर्ष पांच माह (1767-1795) रहा। दो सौ तीस वर्ष बाद भी उनकी कार्यप्रणाली, उनके व्यक्तित्व और दानशीलता को स्मरण किया जाता है। हाल ही में देवी अहिल्याबाई का त्रि-जन्म शताब्दी समारोह देशभर में मनाया गया था। उन्होंने लोक और जन-उपयोगी के कई काम किए थे।
क्या है मणिकर्णिका घाट का महत्व : बता दें कि मणिकर्णिका घाट का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1791 में करवाया गया था। अपनी पौराणिक मान्यता के कारण यह प्रसिद्ध 84 घाटों में शामिल है। धर्मशास्त्र का इतिहास नाम की किताब जिसके लेखक पांडुरंग वामन काणे हैं, के मुताबिक शिव के कान की मणि इसी घाट पर किसी कुंड में गुम हुई थी, इसलिए इस घाट को मणिकर्णिका घाट के नाम से जाना जाता है। बता दें कि इस घाट पर शवों का दाह संस्कार होता है। हजारों लाखों लोग मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यहां आते हैं।
अहिल्या माता का योगदान : बता दें कि देवी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में लोक और जन-उपयोग के कई कार्य किए थे। देवी शिवभक्त थीं, इसलिए उन्होंने मणिकर्णिका घाट का कार्य करवाया था। इसके साथ ही सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य में देवी अहिल्याबाई होलकर ने 1783 में सहयोग दिया था। इस लिहाज से दवी अहिल्या की प्रतिमा को संरक्षित किया जाना था, लेकिन उसे उखाड दिया गया। इंदौर में देवी अहिल्या बाई होलकर को माता का दर्जा दिया गया है, उन्हें यहां पूजा जाता है।
क्या है योजना : दरअसल, जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास योजना का शिलान्यास किया था। घाट का विकास रूपा फाउंडेशन, कोलकाता के फंड से हो रहा है, जिसके तहत 29,350 वर्ग मीटर क्षेत्र में कार्य होना है। मणिकर्णिका घाट में शवों के धुएं के लिए चिमनी और बाढ़ से बचाव का कार्य किया जाना है। लेकिन प्रतिमा हटाने और उसे नुकसान पहुंचाने के बाद इंदौर में इसे लेकर खास आक्रोश और नाराजगी है। खासतौर से मराठी समुदाय के लोगों ने इसे लेकर अपना कडा विरोध जताया है।
Edited By: Navin Rangiyal