बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एचआईवी (HIV) से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सबसे दुखद बात यह है कि यहां नाबालिग भी इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। बता दें कि जहां पहले 30 से 50 साल उम्र तक के लोग इससे पीड़ित होते थे, वहीं अब 18 साल से कम आयु के बच्चों में एचआईवी संक्रमण बढ़ रहा है।
इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। जिले में सालाना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। फिलहाल यहां करीब 8 हजार संक्रमित मरीज रजिस्टर्ड हैं। सीतामढ़ी सदर अस्पताल परिसर में दिसंबर 2012 में एआरटी (ART) सेंटर खुला था, तब से अब तक कुल 7948 मरीज एनरॉल हो चुके हैं।
HIV डेटा पर क्या कहा अस्पताल ने: एचआईवी के मामलों पर सीतामढ़ी के सहायक सिविल सर्जन और एचआईवी नोडल अधिकारी डॉ जे. जावेद ने कहा कि अन्य जिलों में हमसे अधिक एचआईवी के मामले हैं। ये खांसी से फैलने वाली बीमारी नहीं है। ये ब्लड चढ़ाने या एक ही सुई से इंजेक्शन लगने से फैलती है। आज स्कूलों में एड्स और एचआईवी के बारे में पढ़ाया जा रहा है। बेतिया, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर की स्थिति हमसे भी बदतर है। लगभग 250 से 300 मरीज प्रतिदिन दवा लेने हमारे पास आते हैं। जिनका इलाज चल रहा, वैसे मरीजों की कुल संख्या 6707 है। ये आंकड़े 2012 से अब तक के हैं।
कैसे और क्यों लग रही ये बीमारी : मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दीपक कुमार (बदला हुआ नाम) सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। हरियाणा में मजदूरी करते थे। ढाई साल पहले अपने घर पर लौटे तो बीमारी ने जकड़ लिया। घर वाले अस्पताल लेकर पहुंचे, जांच में पाया गया कि दीपक HIV पॉजिटिव हैं। अब दीपक के साथ-साथ उसके परिवार वाले चिंतित हैं कि आगे की जिंदगी कैसे कटेगी?
बच्चे भी हो रहे शिकार : ठीक इसी तरह कई लोग एचआईवी का दंश झेल रहे हैं। सीतामढ़ी जिले के 7,400 लोग इस लाइलाज बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। यह आंकड़ा एआरटी (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी केंद्र) का है, जिसने सबको चौंकाकर रख दिया है। साल 2012 के बाद से यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। दुखद यह है कि एआरटी में जो संख्या पंजिकृत है, उसके अनुसार पहले 30 से 50 की उम्र के लोग संक्रमित होते थे, लेकिन अब बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं। दुख की बात तो यह है कि इसमें 400 बच्चे भी शामिल हैं।
पति से पत्नी और बच्चे मिला संक्रमण : सीतामढ़ी के सुप्पी प्रखंड के एक गांव में एक महिला और उसका बेटा एचआईवी संक्रमित है। महिला का पति दिल्ली में ऑटो चलाता था। महिला का कहना है कि उसका पति एचआईवी संक्रमित था। वह पति के साथ दिल्ली गई थी। पति के संपर्क में आने के कारण वह भी एचआईवी संक्रमित हो गई। इसी दौरान उसने एक बच्चे को भी जन्म दिया और वह भी एचआईवी संक्रमित हो गया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मिल रहे दवा के खाने से वह और उसका बच्चा ठीक है।
सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड के गांव में अरब देश में मजदूरी करने वाले एक व्यक्ति जब वहां से आया तब उसे जांच के दौरान एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। उसके साथ-साथ उसकी पत्नी भी एचआईवी पॉजिटिव पायी गई। अब पति-पत्नी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दी जा रही दवा को खा रहे हैं। पति का कहना है कि समय रहते अगर वह सजग रहता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।
सीतामढ़ी जिले के भारत नेपाल की सीमा बैरगनिया के गांव के रहने वाला एक व्यक्ति, उसकी पत्नी और बच्ची भी एचआईवी पॉजिटिव पाई गई हैं। पति मजदूरी करने पड़ोसी देश नेपाल के काठमांडू में रहता था, वहीं उसे एचआईवी का संक्रमण हो गया। वह जब अपने गांव आया तो पत्नी के संपर्क में आने के कारण पत्नी को और उसके बाद गर्भावस्था के दौरान बच्चा भी एचआईवी पॉजिटिव हो गया।
एचआईवी पॉजिटिव मजदूर का कहना है कि जिन लोगों को जानकारी है कि हम पूरा परिवार एचआईवी पॉजिटिव हैं, वे लोग हमें हीन भावना से देखते हैं। कई लोग बातें करने से भी कतराते है, जबकि जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है कि यह छुआछूत की बीमारी नहीं है। बावजूद इसके अभी भी लोग पुरानी मानसिकता के कारण हमसे दूर रहते हैं।
Edited By: Navin Rangiyal