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भारत-ईयू 'मदर ऑफ ऑल डील्स' फाइनल: लग्जरी कारें, विदेशी शराब और हेल्थकेयर होंगे सस्ते; जानें आप पर क्या होगा असर

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , मंगलवार, 27 जनवरी 2026 (14:28 IST)
India EU Mother of All Deals : 18 साल का लंबा इंतजार खत्म! भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother of All Deals) यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वैश्विक व्यापार के इतिहास का एक नया अध्याय बताया है। लेकिन, सवाल यह है कि नई दिल्ली से ब्रुसेल्स (Brussels) तक हुए इस ऐतिहासिक समझौते से भारत के आम आदमी को क्या मिलने वाला है? आइए समझते हैं।

1. क्या-क्या सस्ता होगा? (आम आदमी के लिए खुशखबरी)

इस समझौते के तहत भारत 90% से अधिक यूरोपीय सामानों पर आयात शुल्क (Import Duty) कम करेगा या पूरी तरह खत्म कर देगा।
 
यूरोपीय कारें: BMW, मर्सिडीज, और वोक्सवैगन जैसी लग्जरी कारें अब आपकी पहुंच में होंगी। 110% तक लगने वाला भारी टैक्स घटकर पहले 40% और फिर चरणबद्ध तरीके से 10% तक आ सकता है।
शराब और लाइफस्टाइल: यूरोपीय वाइन, व्हिस्की और बीयर की कीमतों में भारी गिरावट आएगी। साथ ही ब्रांडेड चॉकलेट, इटैलियन पास्ता और ऑलिव ऑयल भी बजट में होंगे।
हेल्थकेयर: हाई-टेक मेडिकल डिवाइस और यूरोपीय दवाइयां सस्ती होने से इलाज का खर्च कम होगा। ALSO READ: भारत ईयू FTA पर पीएम मोदी का बड़ा एलान, मदर ऑफ ऑल डील को लेकर क्या कहा?

2. नौकरी और सैलरी: युवाओं के लिए बड़े अवसर

यह डील सिर्फ सामान की नहीं, बल्कि 'रोजगार की गारंटी' भी है।
निर्यात में उछाल: भारत के टेक्सटाइल (कपड़ा), लेदर (चमड़ा), और जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को यूरोप के 27 देशों में 'ड्यूटी-फ्री' एंट्री मिलेगी।
लाखों नौकरियां: विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगले 2-3 साल में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
भारतीय प्रोफेशनल्स: इंजीनियरों, डॉक्टरों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यूरोप में काम करना अब पहले से आसान होगा।

3. 'मदर ऑफ ऑल डील्स' की 3 बड़ी बातें

बाजार का आकार : 200 करोड़ लोग और दुनिया की 25% GDP एक मंच पर।
ग्रीन फंड : EU भारत को सस्टेनेबल इंडस्ट्री के लिए 500 मिलियन यूरो की मदद देगा।
सुरक्षा चक्र : डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है ताकि किसानों को नुकसान न हो।
 
हालांकि लग्जरी सामान सस्ते होंगे, लेकिन सरकार ने एक 'सेफगार्ड मैकेनिज्म' भी रखा है। इसका मतलब है कि अगर कोई विदेशी सामान भारतीय छोटे उद्योगों (MSMEs) को नुकसान पहुँचाएगा, तो सरकार टैरिफ वापस बढ़ा सकेगी।

प्रधानमंत्री मोदी का बयान

"यह समझौता वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत को एक 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।" यह डील 2027 की शुरुआततक पूरी तरह लागू हो सकती है। तो तैयार हो जाइए, आपकी लाइफस्टाइल और भारत की इकोनॉमी, दोनों में एक बड़ा बदलाव आने वाला है!

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