Publish Date: Mon, 11 May 2026 (16:03 IST)
Updated Date: Mon, 11 May 2026 (16:12 IST)
भारत की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। 3 मई को आयोजित हुई NEET 2026 परीक्षा से पहले राजस्थान में एक कथित 'गेस पेपर' तेजी से वायरल हुआ था। अब जांच एजेंसियों का दावा है कि उस दस्तावेज़ के करीब 140 सवाल असली परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते हैं। यह लगभग 720 में से 600 अंकों के बराबर माना जा रहा है। मामले की जांच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) कर रही है। जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह महज बेहद सटीक अनुमान वाला पेपर था या फिर वास्तव में परीक्षा पत्र लीक हुआ था।
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब NEET 2024 विवाद की यादें अभी ताजा हैं। पिछले साल पेपर लीक, बढ़े हुए अंक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों ने देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन कराए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था और केंद्र सरकार तथा NTA को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। बिहार में परीक्षा से पहले पेपर पहुंचने की खबरें भी सामने आई थीं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा परीक्षा कराने का आदेश नहीं दिया था, लेकिन उसने परीक्षा प्रणाली में खामियों को स्वीकार करते हुए सुधार के निर्देश दिए थे।
जानकारी के मुताबिक यह सामग्री सबसे पहले 1 मई को राजस्थान के सीकर में सामने आई थी, यानी परीक्षा से दो दिन पहले। इसे खरीदने वालों से 20 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक वसूले जा रहे थे। परीक्षा से एक दिन पहले इसकी कॉपियां करीब 30 हजार रुपये में बेची जा रही थीं। यह पूरा दस्तावेज हस्तलिखित था, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल शामिल थे। शुरुआती जांच में पाया गया कि पूरे दस्तावेज़ की लिखावट एक जैसी थी।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इनमें से लगभग 140 सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में हूबहू पूछे गए। चूंकि NEET के हर सवाल के चार अंक होते हैं, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में सवालों का मेल परीक्षा परिणाम और एडमिशन प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
मामले को और संदिग्ध बनाने वाली बात यह है कि केवल सवाल ही नहीं, बल्कि कई प्रश्नों के उत्तर विकल्पों का क्रम भी वास्तविक परीक्षा से मेल खाता पाया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि सामान्य तौर पर कोई “गेस पेपर” इतनी सटीकता के साथ विकल्पों का क्रम नहीं बता सकता।
SOG की जांच में यह दस्तावेज़ चूरू के एक मेडिकल छात्र तक पहुंचा है, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। आरोप है कि उसने 1 मई को यह सामग्री सीकर के एक व्यक्ति को भेजी थी। इसके बाद यह दस्तावेज़ पीजी हॉस्टल, कोचिंग नेटवर्क, करियर काउंसलर और NEET अभ्यर्थियों के बीच तेजी से फैल गया। मोबाइल फोन से बरामद चैट्स में कई संदेशों पर “forwarded many times” का टैग मिला है, जिससे संकेत मिलता है कि परीक्षा से पहले यह सामग्री बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच चुकी थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसकी प्रिंटेड कॉपियां ऑफलाइन भी बांटी गई थीं।
सीकर के एक पीजी संचालक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उसके पास परीक्षा से पहले ही यह सामग्री थी और उसने इसे आगे भी भेजा। हालांकि परीक्षा खत्म होने के बाद उसी ने पुलिस और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में शिकायत दर्ज कराई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि उसने खुद पर शक कम करने के लिए यह कदम उठाया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और परीक्षा दोबारा कराने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
NTA ने 10 मई को जारी बयान में कहा कि उसे NEET (UG) 2026 से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच की जानकारी है। एजेंसी के मुताबिक परीक्षा के कुछ दिनों बाद उसे संभावित गड़बड़ियों की सूचना मिली थी, जिसे संबंधित एजेंसियों को भेज दिया गया। NTA ने कहा कि जांच एजेंसियां जो भी निष्कर्ष देंगी, उसके आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एजेंसी SOG की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था।
अब NEET 2026 को लेकर उठे नए सवालों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इसका असर न सिर्फ छात्रों के एडमिशन पर पड़ेगा, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में बचा हुआ भरोसा भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। फिलहाल जांच जारी है और पूरे मामले की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है, लेकिन अब तक सामने आए तथ्य बेहद चिंताजनक माने जा रहे हैं। Edited by : Sudhir Sharma
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