Publish Date: Tue, 31 Mar 2026 (15:05 IST)
Updated Date: Tue, 31 Mar 2026 (15:09 IST)
New Labour Codes 2026: भारत में एक अप्रैल 2026 से कई बदलाव हो रहे हैं। केन्द्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों में भी बदलाव किए हैं, ये बदलाव भी 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। माना जा रहा है कि 4 नए लेबर कोड (New Labour Codes) कर्मचारियों और नियोक्ताओं (Employers) के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। इन कानूनों में बदलाव के बाद टेक-होम सैलरी (In-hand Salary) बदलेगी, साथ ही पीएफ, ग्रेच्युटी और काम के घंटों के नियम भी बदल जाएंगे। सरकार ने वेतन (Wages), सामाजिक सुरक्षा (Social Security), औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) और व्यावसायिक सुरक्षा (Occupational Safety) पर 4 नए कोड तैयार किए हैं। इनके लागू होने से कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आइए जानते हैं नए लेबर कोड में 1 अप्रैल से क्या-क्या बदलने जा रहा है...
सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव
नए नियमों के मुताबिक, कर्मचारी की बेसिक सैलरी (Basic Pay) उसके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। अभी कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम और भत्ते ज्यादा रखती हैं। अब भत्ते 50% से ज्यादा नहीं हो सकेंगे। इससे कर्मचारी के पीएफ (PF) में योगदान बढ़ेगा। इससे हर महीने उसके हाथ में आने वाला वेतन कम हो जाएगा। फिलहाल पीएफ की अधिकतम सीमा 15000 (बेसिक) है। ऐसी स्थिति में जिन कर्मचारियों की बेसिक कम है, उन्हें ज्यादा पीएफ कटौती का लाभ मिल सकता है।
ग्रेच्युटी में इजाफा
चूंकि ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने से आपके रिटायरमेंट फंड में ज्यादा पैसा जमा होगा। रिटायरमेंट के समय पीएफ की राशि ज्यादा मिलेगी। ग्रेच्युटी के मामले में अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए 5 साल का इंतजार नहीं करना होगा। ऐसे कर्मचारी 1 साल की सेवा के बाद भी वे ग्रेच्युटी के हकदार हो सकेंगे।
काम के घंटे और छुट्टियां
हालांकि काम के घंटों में कोई बदलाव नहीं होगा, पूर्व की तरह सप्ताह में 48 घंटे काम करने का नियम बरकरार रहेगा। यदि कंपनियां सप्ताह में 4 दिन काम (4 Days of Work) करवाना चाहती हैं तो काम के घंटे बढ़ाकर 12 किए जा सकते हैं। छुट्टियों के इनकेशमेंट के मामले में भी नए लेबर कोड में कुछ बदलाव किए गए हैं।
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट
नौकरी छोड़ने, हटाए जाने या इस्तीफा देने पर कंपनी को 2 वर्किंग डेज के भीतर सारा बकाया (Salary and Dues) चुकाना होंगे। वर्तमान में इसमें इसमें 30 से 60 दिन का समय लगता है।
एम्प्लायर (Employers) को क्या होगा फायदा?
29 अलग-अलग कानूनों के बजाय सिर्फ 4 कोड का पालन करना होगा, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी। इसके साथ ही औद्योगिक संबंधों के नए नियमों से लेबर कोर्ट के चक्कर कम लगेंगे और विवाद जल्दी सुलझेंगे। पंजीकरण, लाइसेंसिंग और रिटर्न भरने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। काम के घंटों और फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट (FTE) के नियमों में लचीलापन आने से कंपनियां जरूरत के हिसाब से भर्ती कर सकेंगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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