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G RAM G बिल पर शशि थरूर कांग्रेस के साथ, बोले- राम का नाम बदनाम ना करो...

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 (14:48 IST)
Shashi Tharoor on G RAM G: कई बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ कर चुके कांग्रेस सांसद शशि थरूर काफी समय बाद कांग्रेस के सुर में सुर मिलाते दिखे। G RAM G बिल पर प्रियंका गांधी के बाद बोलने के लिए खड़े हुए थरूर ने कहा कि मैं मनरेगा स्कीम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम बदलने के खिलाफ हूं।  
  
पीछे ले जाने वाला कदम : शशि थरूर ने कहा कि मैं प्रस्तावित बिल VB–G RAM G (Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Gramin) बिल को पेश करने का विरोध करता हूं, जो हमारे देश और हमारे देश के सबसे कमजोर नागरिकों के कल्याण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के लिए एक बहुत ही दुखद और पीछे ले जाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि मेरा पहला विरोध, दूसरों की तरह राष्ट्रपिता का नाम हटाने के गलत फैसले पर है। हालांकि इसके कारण पहले ही बताए जा चुके हैं, जिन्हें मैं दोहराऊंगा नहीं। लेकिन यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, यह इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की मूल भावना और दार्शनिक नींव पर हमला है।
 
केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से सांसद थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी का राम राज्य का विजन कभी भी राजनीतिक प्रोजेक्ट नहीं था। यह गांवों के सशक्तिकरण पर आधारित एक सामाजिक-आर्थिक खाका था और ग्राम स्वराज में उनका अटूट विश्वास उस विजन का केंद्र था। मूल अधिनियम (मनरेगा) उनका नाम रखकर इस गहरे जुड़ाव को स्वीकार करता था कि सच्ची रोजगार गारंटी और उत्थान जमीनी स्तर से होना चाहिए, जो सबसे आखिरी व्यक्ति को पहले रखने के उनके सिद्धांत को दर्शाता है।
 
राम का नाम बदनाम ना करो... : उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना बिल को उसकी नैतिक दिशा और ऐतिहासिक वैधता से वंचित करना है। उन्होंने एक फिल्मी गीत की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा- देखो ओ दीवानों ये काम न करो, राम का नाम बदनाम ना करो....
 
उन्होंने कहा कि हमें बिल पर सवाल उठाते हुए कहा कि 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ सीधे राज्य सरकारों पर डालने का प्रस्ताव न केवल वित्तीय रूप से गैर-जिम्मेदाराना है। इससे राज्यों के समक्ष संकट की स्थिति उत्पन्न होगी, जिनके पास राजस्व का संग्रह कम है। यह एक ऐसा कदम है जो पूरे कार्यक्रम को अव्यावहारिक बनाने की कोशिश है। इससे मजदूरी के भुगतान में देरी होगी, काम के दिनों की संख्या में कमी आएगी और अंततः यह योजना ही खत्म हो जाएगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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