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जंग की ओर बढ़ रहे हैं Pakistan-Afghanistan? जानिए किसकी सेना में कितना है दम और भारत के लिए क्या हैं इसके मायने

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Pak Afgan war
Pakistan Afghanistan Conflict: पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच 'डूरंड लाइन' पर अक्सर तनाव रहता था, लेकिन अब हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा अफ़ग़ान सीमा के भीतर किए गए हमलों ने दोनों देशों को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

तनाव की असली जड़ क्या है?

पाकिस्तान का आरोप है कि TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) अफ़ग़ान ज़मीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में आतंकी हमले कर रहा है। वहीं, काबुल में बैठी तालिबान सरकार इन दावों को नकारती है। दशकों तक जिस तालिबान को पाकिस्तान ने 'रणनीतिक संपत्ति' माना, आज वही उसके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।

सैन्य मुकाबला

तालिबान बनाम पाकिस्तानी फौज के बीच यदि पूर्ण युद्ध होता है, तो मुकाबला काफी दिलचस्प होगा :
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विशेषज्ञों का मानना है : पाकिस्तान के पास तकनीक है, लेकिन तालिबान के पास वह जिद्दी जुझारूपन है जिसने सोवियत संघ और अमेरिका जैसी महाशक्तियों को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

भारत के लिए यह तनाव क्यों अहम है? 

भारत इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:
  • दो मोर्चों पर फंसा पाकिस्तान : पाकिस्तान का पश्चिमी सीमा (अफ़ग़ानिस्तान) पर उलझना भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे पाकिस्तान की सेना का ध्यान और संसाधन कश्मीर सीमा (LOC) से हटकर अपनी सुरक्षा में लग रहे हैं।
  • अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत के रिश्ते : भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों में भारी निवेश किया है। तालिबान शासन के बावजूद, भारत ने मानवीय सहायता और तकनीकी मिशन के जरिए अफ़ग़ान जनता के साथ संबंध बनाए रखे हैं।
  • आतंकवाद पर रुख: भारत हमेशा से कहता रहा है कि पाकिस्तान द्वारा पाले गए आतंकी समूह अंततः उसी को नुकसान पहुँचाएंगे। आज TTP के रूप में पाकिस्तान वही भुगत रहा है जो उसने बोया था।
  • क्षेत्रीय स्थिरता : भारत एक स्थिर अफ़ग़ानिस्तान चाहता है, लेकिन पाकिस्तान और तालिबान के बीच युद्ध से शरणार्थी संकट और अस्थिरता बढ़ सकती है, जो दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है।

क्या वास्तव में युद्ध होगा?

पूर्ण युद्ध की संभावना कम है क्योंकि:
  • आर्थिक संकट : पाकिस्तान के पास युद्ध लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं; वह डिफॉल्ट होने की कगार पर है।
  • तालिबान की प्राथमिकता : तालिबान अपनी सत्ता बचाना और मान्यता प्राप्त करना चाहता है, न कि एक पूर्ण सैन्य संघर्ष में उलझना।
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच की कड़वाहट भारत के 'पड़ोसी पहले' की नीति के लिए एक चुनौतीपूर्ण मोड़ है। पाकिस्तान अब अपनी ही बनाई 'भस्मासुर' नीतियों का शिकार हो रहा है।

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