Publish Date: Mon, 09 Feb 2026 (10:57 IST)
Updated Date: Mon, 09 Feb 2026 (11:06 IST)
PM Modi Pariksha Pe Charcha : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पर चर्चा के दूसरे एपिसोड में 10वीं और 12वीं के छात्रों से संवाद किया। उन्होंने टेक्नोलॉजी का सही उपयोग, मोबाइल की लत से बचाव, तनाव प्रबंधन, नींद, अनुशासन और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। परीक्षा पर चर्चा की 5 खास बातें...
मोबाइल कुछ बच्चों का मालिक बना
पीएम मोदी ने कहा कि हर युग में जब भी कोई नई टेक्नोलॉजी आती है, तो चर्चा होती है। हमें किसी चीज से डरना नहीं चाहिए। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम उसके गुलाम नहीं बनेंगे। जैसे मोबाइल आजकल कुछ बच्चों का मालिक बन गया है, अगर मोबाइल नहीं है, तो खाना नहीं खा सकता, टीवी नहीं है, तो वो जी नहीं सकता। मतलब आप उसके गुलाम बन गए। मैं गुलाम नहीं बनूंगा, एक बार मन में ये पक्का कर लीजिए।
तनाव से कैसे बचें
उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए सबसे एक ही बात होती है कि आप पेपर सॉल्व करने की आदत डालें, यानी लिखने की। ज्यादातर लोग पढ़ते हैं। अगर खुद इस प्रकार आप अभ्यास करेंगे, तो मुझे पक्का विश्वास है कि आपको तनाव नहीं आएगा। दूसरी सबसे बड़ी चीज है, जो आज लोगों के ध्यान में नहीं है, वो है नींद। अच्छी नींद लेनी ही चाहिए। पूरी नींद लेने के बाद बाकी समय आपका मन बहुत प्रफुल्लित रहता है।
शिक्षा जीवन में जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से कहा, शिक्षा की जीवन में भी जरूरत है और सामाजिक जीवन में भी जरूरत है। इसको अंडर एस्टिमेट नहीं करना चाहिए। ये गलती कभी मत करना कि खेल में मैं बहुत अच्छा हूं, इसलिए मुझे पढ़ने की जरूरत नहीं है। लेकिन, शिक्षा ही सबकुछ कर लेगी ऐसा नहीं है। आपमें जो भी हुनर है, उसे डेवलप करना चाहिए।
जीवन में अनुशासन बहुत अनिवार्य
पीएम मोदी ने कहा कि जीवन में अनुशासन बहुत अनिवार्य है। ये इंस्पिरेशन में सोने पर सुहागा का काम करता है। अगर डिसिप्लिन ही नहीं है, तो कितना ही इंस्पिरेशन हो, वो बोझ बन जाता है, निराशा पैदा करता है। अनुशासन और मोटिवेशन दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण हैं। अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना भी इंस्पिरेशन हो, वो किसी काम नहीं आएगा।
जीवन में संतोष हो तो प्रगति नहीं
जीवन में अगर संतोष हो जाता है, तो फिर जीवन में प्रगति नहीं होती। मन में जिद तो रहनी चाहिए, मैंने पहले भी कहा है कि हमें लगातार खुद से कॉम्पिटिशन करते रहना चाहिए। हमें खुद से भी पूछना चाहिए कि मेरे जीवन में ये बदलाव क्यों आया? ये कमी क्यों रही? क्या कारण रहा?
edited by : Nrapendra Gupta