What is a vote of thanks: संसद के बजट सत्र का सातवां दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अनचाहे रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हो गया है। बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भारी हंगामे के बीच बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही पास कर दिया गया।
22 साल बाद दोहराया गया इतिहास
संसदीय इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब प्रधानमंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब न दे पाएं। आखिरी बार ऐसी स्थिति 10 जून 2004 को बनी थी, जब विपक्ष के विरोध के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह अपना संबोधन नहीं दे सके थे। 2026 में एक बार फिर विपक्ष के आक्रामक रुख के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिना बोले ही बैठना पड़ा।
मनोज तिवारी के आरोप से मचा हड़कंप
सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष का यह व्यवहार केवल विरोध नहीं, बल्कि एक 'सुनियोजित साजिश' है ताकि प्रधानमंत्री को जनता के सामने अपनी बात रखने से रोका जा सके। तिवारी ने यहां तक संकेत दिए कि सदन के भीतर कुछ विपक्षी सदस्यों का आचरण सुरक्षा और मर्यादा की सीमाओं को पार कर रहा था।
हंगामे की मुख्य वजह विपक्षी दल बजट सत्र की शुरुआत से ही बेरोजगारी, महंगाई और हालिया जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी अपना भाषण शुरू करने के लिए खड़े हुए, विपक्षी सांसदों ने वेल (सदन के बीचों-बीच) में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर के बार-बार अनुरोध के बावजूद जब शोर नहीं थमा, तो विधायी कार्यों को पूरा करते हुए प्रस्ताव को बिना भाषण के ही पास करा दिया गया।
संसदीय परंपराओं पर सवाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने संसदीय परंपराओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया मानी जाती है, जिसे विपक्ष के कड़े विरोध ने इस बार बाधित कर दिया।
क्या होता है धन्यवाद प्रस्ताव?
संविधान के अनुच्छेद 87 के तहत, राष्ट्रपति हर साल के पहले सत्र में दोनों सदनों को संबोधित करते हैं। इस पर चर्चा के बाद 'धन्यवाद प्रस्ताव' लाया जाता है, जिसका जवाब प्रधानमंत्री देते हैं। 2004 में विपक्ष (NDA) ने दागी मंत्रियों के मुद्दे पर मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था और उन्हें बोलने नहीं दिया था।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala