Publish Date: Mon, 25 May 2026 (07:39 IST)
Updated Date: Mon, 25 May 2026 (12:00 IST)
Petrol Diesel Price Hike : तेल कंपनियों ने सोमवार 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया। इससे दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपए पार हो गया। पिछले 11 दिन में पेट्रोल 7 रुपए 35 पैसे और डीजल 7 रुपए 53 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है।
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपए और डीजल की कीमत 95.20 रुपए हो गई है। कोलकाता में पेट्रोल 2.87 रुपए बढ़कर 113.51 रुपए और डीजल 2.80 रुपए बढ़कर 99.82 रुपए प्रति लीटर हो गया। चेन्नई में पेट्रोल 2.46 और डीजल 2.55 रुपए बढ़कर क्रमश: 107.77 और 99.55 रुपए प्रति लीटर हो गया। मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम 111.21 और 97.83 रुपए प्रति लीटर हो गया।
4 बार में कितने बढ़े दाम
15 मई को भी पेट्रोल डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में औसतन 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किया गया था। 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल रुपए 2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया।
क्यों महंगा हुआ पेट्रोल डीजल?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 4 साल की लंबी स्थिरता (यानी कीमतों के स्थिर रहने) के बाद हाल ही में ईंधन के दामों में बढ़ोतरी करना शुरू किया है। इस महंगाई के मुख्य कारण हैं:
पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव : इस समय अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल है। इस संघर्ष की वजह से स्ट्रेट ऑफ हारमुज से होने वाली तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 50% से अधिक बढ़ चुकी हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी : भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है और इसका भुगतान डॉलर में होता है। वैश्विक तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 6% से 10% तक कमजोर हुआ है। रुपया कमजोर होने से भारत के लिए कच्चे तेल का आयात करना और भी ज्यादा महंगा हो गया है।
तेल कंपनियों का भारी नुकसान : पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के बावजूद भारतीय तेल कंपनियों (जैसे IOC, BPCL, HPCL) ने देश में कीमतें नहीं बढ़ाई थीं। इसकी वजह से इन कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब अपनी वित्तीय स्थिति को संभालने और घाटे को कम करने के लिए कंपनियां धीरे-धीरे किश्तों में दाम बढ़ा रही हैं।
क्या होगा असर?
महंगाई में बढ़ोतरी : डीजल का सबसे बड़ा उपयोग ट्रकों और परिवहन वाहनों में होता है। जब डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है। खेत से मंडी और मंडी से आप तक सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। दूध, फल और पैकेज्ड फूड की कीमतों में भी उछाल आता है।
मध्यम वर्ग के बजट पर असर: पेट्रोल महंगा होने से ऑफिस जाने या निजी काम के लिए गाड़ी इस्तेमाल करने वालों का मासिक खर्च बढ़ जाता है, जिससे उनकी बचत कम हो जाती है। बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए जब RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो होम लोन और कार लोन की EMI भी महंगी हो सकती है।
उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव : कई फैक्ट्रियों में मशीनों और जनरेटरों के लिए ईंधन का उपयोग होता है। लागत बढ़ने से अंततः प्रोडक्ट की कीमत बढ़ जाती है। कच्चे तेल का उपयोग पेंट, प्लास्टिक और केमिकल्स बनाने में होता है, इसलिए इन चीज़ों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर : भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज़्यादा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमज़ोर हो सकता है। सरकार और तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, जिससे विकास कार्यों के लिए फंड कम हो सकता है।
edited by : Nrapendra Gupta
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