Publish Date: Tue, 19 May 2026 (07:43 IST)
Updated Date: Tue, 19 May 2026 (08:05 IST)
Petrol Diesel Price Hike : पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से सरकारी तेल कंपनियों ने देश में 4 दिन में दूसरी बार पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई है। दिल्ली में पेट्रोल जहां 98.64 रुपए और डीजल 91.58 रुपए में मिलेगा। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपए प्रति लीटर हो गई। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 96 पैसे बढ़कर 109.70 रुपए प्रति लीटर हो गई, वहां डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपए लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़कर 96.11 रुपए प्रति लीटर हो गई।
क्या है क्रूड का हाल?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से तेल सप्ताल बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 109.5 और WTI क्रूड 102.5 डॉलर प्रति बैरल हो गए। इंडियन बास्केट में भी कच्चे तेल के दाम 110.7 डॉलर प्रति बैरल है।
क्यों बढ़े पेट्रोल डीजल के दाम?
कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहने की वजह से तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। इस नुकसान की भरपाई करने के लिए देश में पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
क्या होगा असर?
महंगाई में बढ़ोतरी : डीजल का सबसे बड़ा उपयोग ट्रकों और परिवहन वाहनों में होता है। जब डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है। खेत से मंडी और मंडी से आप तक सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। दूध, फल और पैकेज्ड फूड की कीमतों में भी उछाल आता है।
मध्यम वर्ग के बजट पर असर: पेट्रोल महंगा होने से ऑफिस जाने या निजी काम के लिए गाड़ी इस्तेमाल करने वालों का मासिक खर्च बढ़ जाता है, जिससे उनकी बचत कम हो जाती है। बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए जब RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो होम लोन और कार लोन की EMI भी महंगी हो सकती है।
उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव : कई फैक्ट्रियों में मशीनों और जनरेटरों के लिए ईंधन का उपयोग होता है। लागत बढ़ने से अंततः प्रोडक्ट की कीमत बढ़ जाती है। कच्चे तेल का उपयोग पेंट, प्लास्टिक और केमिकल्स बनाने में होता है, इसलिए इन चीज़ों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर : भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज़्यादा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमज़ोर हो सकता है। सरकार और तेल कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, जिससे विकास कार्यों के लिए फंड कम हो सकता है।
edited by : Nrapendra Gupta
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