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दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हाहाकार, लेकिन भारत में वृद्धि सबसे कम; जानें अमित मालवीय के चौंकाने वाले आंकड़े

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amit malviya on petrol diesel rates
Petrol Diesel Price Hike : देश में शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपए लीटर बढ़ गए। इस मामले में देश की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस समेत विपक्ष ने महंगाई बढ़ने की आशंका जताते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा तो भाजपा नेता अमित मालवीय ने आंकड़ों के सहारे दाम बढ़ाने वाले फैसले का बचाव करते हुए कहा कि दुनिया के मुकाबले भारत में तेल के दाम सबसे कम बढ़े हैं।
 
भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में भारी उछाल आया है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बंद होने और तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इसका असर दुनिया की लगभग हर अर्थव्यवस्था में सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखाई दिया। लेकिन भारत इस पूरी तस्वीर में एक अलग और उल्लेखनीय अपवाद बनकर उभरा है।

 

कहां कितना बढ़ा पेट्रोल डीजल?

उन्होंने कहा कि 23 फरवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच अधिकांश देशों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई। म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% फीसदी महंगा हो गया। पाकिस्तान में पेट्रोल 54.9%, डीजल 44.9%, संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोल 52.4% और डीजल 86.1% फीसदी बढ़ा। अमेरिका में पेट्रोल के दाम 44.5% और डीजल के दाम 48.1% बढ़े तो श्रीलंका में पेट्रोल 38.2% और डीजल 41.8% महंगा हुआ। ब्रिटेन में पेट्रोल 19.2%, डीजल 34.2% फीसदी महंगे हो गए। जर्मनी और जापान में पेट्रोल 13.7%, और 9.7 फीसदी तथा  डीजल 19.8% और 11.2% महंगे हो गए।
 
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भारत में लोगों पर सबसे कम बोझ

मालवीय ने कहा कि भारत में वृद्धि सबसे कम रही। यहां पेट्रोल 3.2% और डीजल 3.4% महंगे हुए। केवल सऊदी अरब में कोई वृद्धि नहीं हुई, क्योंकि वहाँ प्रत्यक्ष सरकारी सब्सिडी व्यवस्था लागू है। लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा जहां आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा।
 
उन्होंने कहा कि यह अपने आप नहीं हुआ। पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद पूरे 76 दिनों तक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, जिनकी खुदरा बाजार में लगभग 90% हिस्सेदारी है, ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे जनता पर नहीं डाला। उन्होंने स्वयं लागत का बड़ा हिस्सा वहन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ तक की अंडर-रिकवरी हो रही थी।
 

बाकी दुनिया से तुलना कीजिए

मालवीय के अनुसार, पाकिस्तान में लोग तीन महीने पहले की तुलना में लगभग 55% अधिक कीमत चुका रहे हैं। मलेशिया में 56% अधिक। अमेरिका में लगभग 45% अधिक। कई देशों में डीजल की कीमतें 50% से लेकर 100% तक बढ़ चुकी हैं क्योंकि डीजल सीधे माल ढुलाई, व्यापार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ा है। भारत ने इसके विपरीत, 2 महीने से अधिक समय तक वैश्विक तेल संकट का असर आम नागरिकों तक पहुंचने से रोके रखा और फिर भी केवल सीमित व संतुलित वृद्धि की। यह सिर्फ पेट्रोल पंप की कीमतों का मामला नहीं है।
 
उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतें परिवहन, खाद्य वस्तुओं, लॉजिस्टिक्स, निर्माण लागत और आम परिवारों के बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। ईंधन मूल्य नियंत्रण का अर्थ है महंगाई पर नियंत्रण। इसलिए कहानी सिर्फ 3 रुपए बढ़ने की नहीं है। असल कहानी यह है कि जब दुनिया के अधिकांश देशों में पेट्रोल-डीज़ल 10%, 20%, 50% और कहीं-कहीं 90% तक महंगे हो गए, तब भारत ने वृद्धि को केवल लगभग 3% तक सीमित रखा।
edited by : Nrapendra Gupta

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