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पीएम मोदी की अपील पर छिड़ा सियासी घमासान; क्या बोले राहुल गांधी और अखिलेश यादव?

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rahul modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग ज्यादा करने, वर्क फ्रॉम होम करने के साध ही एक साल तक सोना नहीं खरीदने की भी अपील की। विपक्ष ने पीएम मोदी पर जमकर पलटवार किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे विफलताओं का प्रमाण बताया तो अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही संकट याद आ गया। ALSO READ: भारत में तेल के कुएं नहीं, संयम से करें पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल, PM मोदी ने क्‍यों की यह अपील?
 
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मोदी जी ने कल जनता से कुर्बानियों की मांग की। सोना न खरीदें, विदेश न जाएं, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें, खाद और खाने के तेल में कटौती करें, मेट्रो से चलें और वर्क फ्रॉम होम करें। ये उपदेश नहीं हैं, ये विफलताओं के प्रमाण हैं। 
 
12 वर्षों में, उन्होंने देश को उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां जनता को बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं, कहां जाना है और कहां नहीं। हर बार, वे अपनी जवाबदेही से बचने के लिए जिम्मेदारी जनता के कंधों पर डाल देते हैं। देश चलाना अब एक समझौतापरस्त प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं रही। ALSO READ: क्या आप मानेंगे पीएम मोदी की बात? एक साल सोना न खरीदने से कैसे बदल जाएगी भारत की किस्मत?
अखिलेश यादव ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, चुनाव खत्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’ इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है। 

जनता से नहीं भाजपाइयों से करो अपील

उन्होंने कहा कि सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक। 
 

चुनाव बाद क्यों याद आई पाबंदियां

सपा नेता ने कहा कि  वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियां जनता के लिए ही हैं क्या? इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं। 
 

जनता ने भुगता खामियाजा

अखिलेश ने कहा कि अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ खास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका खामियाजा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मजदूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
 

अखिलेश का भाजपा पर बड़ा आरोप

उन्होंने कहा कि भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी। देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
edited by : Nrapendra Gupta

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