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पीएम मोदी ने राज्यसभा में खरगे, शरद पवार को सराहा, जानिए क्या कहा?

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PM Modi in rajyasabha
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में 37 सांसदों की विदाई के अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार की जमकर सराहना की। 
 
उन्होंने कहा कि मैं जरूर कहूंगा कि आदरणीय देवेगौड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन की आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्यप्रणाली में गई है और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों को इनसे सीखना चाहिए कि समर्पित भाव से सदन में आना, जो उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना। यानी समाज में से जो जिम्मेदारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखना चाहिए। मैं उनके योगदान की भूरि-भूरि सराहना करूंगा।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर सामाजिक जीवन में कुछ न कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं हैं, उनको मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है। भविष्य आपका इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा बना रहेगा।
 
उन्होंने कहा कि इस सदन से हर 2 साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है। लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको 4 साल से यहां बैठे साथियों से कुछ न कुछ सीखने का अवसर मिलता है। मुझे विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, आने वाले नए माननीय सांसदों को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा।
 
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, इन सभी को पुराने और नए संसद भवन में बैठने का भी मौका मिला। इनको दोनों इमारतों में राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने एक अवसर मिला है और अपने कार्यकाल में ही उनको इस नए सदन की निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है। ये इनके जीवन में एक नई याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।
 
उन्होंने कहा कि सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन, जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है कि हमारे ये साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
edited by : Nrapendra Gupta

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