Publish Date: Mon, 23 Feb 2026 (17:50 IST)
Updated Date: Mon, 23 Feb 2026 (17:56 IST)
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश की पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति जारी कर दी है। सोमवार को जारी नीति का नाम प्रहार रखा गया है। नीति के मुताबिक भारत को सीमा पार आतंकवाद और साइबर हमलों का खतरा है। इसके साथ ही ड्रोन और नई टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कर देश की सुरक्षा को निशाना बनाने की कोशिशें जारी हैं।
आतंकवाद के खिलाफ दशकों से अग्रिम पंक्ति में खड़े भारत ने अब अपनी रणनीति को और अधिक धारदार बना दिया है। 'जीरो टॉलरेंस' (कतई बर्दाश्त नहीं) की नीति पर चलते हुए भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद का कोई धर्म, जाति या राष्ट्रीयता नहीं होती और हिंसा को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। आतंकी खतरों से निपटने के लिए भारत अब 'प्रहार' (PRAHAAR) रणनीति पर काम कर रहा है, जो सुरक्षा बलों की कार्रवाई से लेकर समाज की भागीदारी तक सात मुख्य स्तंभों पर टिकी है।
क्या है 'PRAHAAR' रणनीति?
भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति इन सात बिंदुओं पर केंद्रित है:
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P (Prevention): नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हमलों को रोकना।
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R (Response): खतरे के अनुरूप त्वरित और सटीक जवाबी कार्रवाई।
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A (Aggregating): सरकार के सभी अंगों के बीच तालमेल बिठाकर आंतरिक क्षमता बढ़ाना।
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H (Human Rights): मानवाधिकारों और कानून के शासन (Rule of Law) का पालन।
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A (Attenuating): कट्टरपंथ जैसी उन स्थितियों को खत्म करना जो आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं।
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A (Aligning): आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को एकजुट करना।
R (Recovery): समाज की भागीदारी से आतंकी हमलों के बाद स्थिति को सामान्य करना।
नई तकनीक और उभरती चुनौतियां
रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद भारत के लिए मुख्य चुनौती बना हुआ है। अल-कायदा और ISIS जैसे वैश्विक समूह स्लीपर सेल्स के जरिए देश में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।
ड्रोन तकनीक: पंजाब और जम्मू-कश्मीर में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सीमा पार के हैंडलर आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डार्क वेब और क्रिप्टो: आतंकी समूह अब प्रचार, फंडिंग और संचार के लिए एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट का सहारा ले रहे हैं ताकि उनकी पहचान छिपी रहे।
CBRNED खतरा: रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRNED) सामग्री तक आतंकियों की पहुंच रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
सुरक्षा तंत्र की मजबूती: MAC और NIA की भूमिका
भारत की रणनीति अब 'इंटेलिजेंस-गाइडेड' है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के तहत मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) वास्तविक समय (Real-time) में जानकारी साझा करने का मुख्य मंच बन गया है।
NIA और NSG: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की उच्च दोषसिद्धि दर (High Conviction Rate) आतंकियों के लिए डर पैदा कर रही है, वहीं नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) किसी भी बड़े हमले का मुकाबला करने के लिए नोडल फोर्स के रूप में तैनात है।
समुद्र से आसमान तक पहरा: बिजली, रेलवे, विमानन और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
कट्टरपंथ के खिलाफ 'सॉफ्ट पावर' का इस्तेमाल
सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि भारत सरकार सामाजिक स्तर पर भी आतंकवाद की जड़ों पर वार कर रही है:
डी-रेडिकलाइजेशन: गुमराह युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सामुदायिक और धार्मिक नेताओं की मदद ली जा रही है।
आर्थिक सशक्तिकरण: संवेदनशील क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए विशेष छात्रवृत्ति और ऋण योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि आतंकी इन परिस्थितियों का फायदा न उठा सकें।
वैश्विक मंच पर भारत की धमक
भारत ने अब तक कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT) की है। इसके परिणामस्वरूप विदेशों में छिपे कई आतंकियों को भारत वापस लाया गया है या वहीं उन पर कार्रवाई की गई है। भारत अब संयुक्त राष्ट्र (UN) में आतंकवाद पर एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढांचे (CCIT) के लिए दबाव बना रहा है। Edited by : Sudhir Sharma