भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन
Droupadi Murmu's address to the nation : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या यानी 25 जनवरी 2026 (रविवार) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेहनती किसानों की पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। राष्ट्रपति ने कहा, हम भारत के लोग, देश और विदेश में पूरे जोश के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में हमारे देश की स्थिति और दिशा पर सोचने का मौका देता है।
खबरों के अनुसार, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या यानी 25 जनवरी 2026 (रविवार) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेहनती किसानों की पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार आर्थिक वृद्धि दर्ज कर रहा है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है।
राष्ट्रपति ने कहा, हम भारत के लोग, देश और विदेश में पूरे जोश के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में हमारे देश की स्थिति और दिशा पर सोचने का मौका देता है। अपने भाषण में राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, संवैधानिक आदर्शों और साझा जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने नागरिकों से एकता, समावेशिता और दृढ़ता मजबूत कर एक समृद्ध, आत्मनिर्भर व प्रगतिशील भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवित रखने का हर प्रयास बहुत सराहनीय है। राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रमुख राष्ट्रीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि भी दी। संविधान को दुनिया के सबसे बड़े गणतंत्र का मूलभूत दस्तावेज़ बताते हुए, राष्ट्रपति ने जोर दिया कि यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्शों को दर्शाता है।
राष्ट्रपति ने 23 जनवरी को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाई जाने वाली नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का भी जिक्र किया। 2021 से मनाए जा रहे इस दिवस का उद्देश्य युवाओं को नेताजी की अदम्य देशभक्ति से प्रेरणा दिलाना है। राष्ट्रपति ने कहा, उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से लेकर पश्चिम तक, हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता का ताना-बाना हमारे पूर्वजों ने बुना था।
राष्ट्रपति ने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' हमारी गीतात्मक राष्ट्रीय प्रार्थना है। राष्ट्रपति ने कहा, 26 जनवरी, 1950 से हम अपने गणतंत्र को अपने संवैधानिक आदर्शों की ओर बढ़ा रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह से लागू हुआ। हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य का मूलभूत दस्तावेज़ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि दशकों से गरीबी के साथ जूझ रहे करोड़ों देशवासियों को गरीबी की सीमा रेखा से ऊपर लाया गया है। अंत्योदय की संवेदना को कार्यरूप देने वाली विश्व की सबसे बड़ी योजना, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना इस सोच पर आधारित है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले हमारे देश में कोई भी भूखा न रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 2022 में पदभार संभालने के बाद से यह उनका चौथा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर संबोधन है।
Edited By : Chetan Gour