प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बार-बार मन में प्रश्न आ रहा है कि ठीक 1000 वर्ष पहले, ठीक इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा? अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने महादेव के लिए हमारे पुरखों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। 1000 साल पहले वह आक्रंता सोच रहे थे कि हमें जीत लिया कि आज 1000 साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है।
मोदी ने कहा कि यह समयचक्र है, सोमनाथ को ध्वस्त करने की मंशा लेकर आए मजहबी आक्रांता आज इतिहास के कुछ पन्नों में सिमट कर रह गए हैं और सोमनाथ मंदिर उसी विशाल समुद्र के किनारे गगनचुंबी धर्मध्वजा को थामे खड़ा है।
यहां का कण-कण वीरता और साहस का साक्षी है। सोमनाथ, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस आयोजन में गर्व, गरिमा, गौरव है। इसमें गरिमा का ज्ञान, वैभव की विरासत, अध्यात्म की अनुभूति है। इसमें अनुभव है, आनंद है, आत्मीयता है और सबसे बढ़कर महादेव का आशीर्वाद है। पीएम मोदी ने कहा कि यह समय अद्भुत है, यह वातावरण अद्भुत है, यह उत्सव अद्भुत है।
एक ओर स्वयं महादेव दूसरी ओर समुद्र की विशाल लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की यह गूंज, आस्था का यह उफान और इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के आप सब भक्तों की उपस्थिति यह इस अवसर को दिव्य, भव्य बना रही है। मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सक्रिय सेवा का अवसर मिला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि "जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है, वे मज़हबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं उसके नाम में ही 'सोम' अर्थात 'अमृत' जड़ा हुआ है। उसके ऊपर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है जो कल्याणकारी भी है और शक्ति का स्रोत भी है। Edited by : Sudhir Sharma