Publish Date: Mon, 30 Mar 2026 (14:40 IST)
Updated Date: Mon, 30 Mar 2026 (14:51 IST)
Raghav Chadha Mumbai Airport Tea: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मुंबई एयरपोर्ट का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा- मुंबई एयरपोर्ट पर 'उड़ान यात्री कैफ़े' गया और वहां सिर्फ 10 रुपए में चाय पी। मैं दिल्ली जा रहा था और फ्लाइन से पहले चाय पीना चाहता था। दरअसल, राघव ने पिछले दिनों एयरपोर्ट की महंगी चाय-कॉफी और खाने-पीने की चीजों का मुद्दा सदन में उठाया था। उसी बात का असर है कि उन्होंने 10 रुपए की चाय पी।
राघव ने एक्स पर लिखा- वहां रहते हुए मैंने कई यात्रियों से बात की। वे सभी खुश थे, और सभी एक ही बात कह रहे थे। जेब पर भारी नहीं, अच्छी सर्विस, पैसे की पूरी कीमत। एयरपोर्ट पर किफायती खाना मिलना मुमकिन है। और यह उसका सबूत है।
सदन में क्या मुद्दा उठाया था चड्ढा ने?
गौरतलब है कि सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा के मार्च 2026 के सत्र के दौरान हवाई अड्डों (Airports) पर मिलने वाले खाने-पीने की चीजों, विशेषकर चाय और कॉफी की अत्यधिक कीमतों का मुद्दा बहुत ही दिलचस्प और तार्किक तरीके से उठाया था। चड्ढा ने हवाई अड्डों पर 200 से 400 के बीच बिकने वाली एक कप चाय और कॉफी को 'लूट' करार दिया था। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था कि हवाई अड्डे पर चाय पीना अब एक मिडिल क्लास आदमी के लिए विलासिता (Luxury) बन गया है।
उन्होंने सदन में डेटा पेश करते हुए कहा कि कई बार एक कप कॉफी की कीमत एयरलाइन के डिस्काउंटेड टिकट या 'बेस फेयर' के बराबर पहुंच जाती है। चड्ढा ने कहा कि हवाई अड्डों के अंदर प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। सुरक्षा कारणों से यात्रियों के पास बाहर से पानी या खाना ले जाने का विकल्प भी नहीं होता। उन्होंने मांग की थी कि हर हवाई अड्डे पर कम से कम 2-3 ऐसे काउंटर अनिवार्य होने चाहिए जहां चाय, कॉफी और साधारण नाश्ता बाजार की कीमतों पर मिले।
सरकार ने दिया था आश्वासन
उन्होंने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा था कि हवाई अड्डों पर 'स्पेशल पैकेजिंग' के नाम पर पानी की बोतल और बिस्किट पर MRP से ज्यादा पैसे न वसूले जाएं। इस मुद्दे पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए आश्वासन दिया था कि वे हवाई अड्डों पर 'इकोनॉमी जोन' या किफायती स्टॉल लगाने की संभावना पर विचार करेंगे ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
और क्या जनहित के मुद्दे उठाए राघव ने?
मोबाइल डेटा : राघव चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों द्वारा ग्राहकों के अनयूज्ड (बचे हुए) डेटा को खत्म करने के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने सदन में तर्क दिया कि जब ग्राहक पूरे डेटा (जैसे 1.5GB/दिन) के लिए पैसे देता है, तो रात 12 बजे बचा हुआ डेटा एक्सपायर क्यों हो जाता है? उन्होंने कहा- पेट्रोल की तरह, जो डेटा बच जाए उसे अगले दिन या महीने के लिए 'कैरी फॉरवर्ड' किया जाना चाहिए।
ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न : एक अन्य मामले में चड्ढा ने प्रस्ताव दिया कि शादीशुदा जोड़ों को 'ज्वाइंट इनकम टैक्स रिटर्न' भरने का विकल्प मिलना चाहिए ताकि लोगों पर टैक्स का बोझ कम हो सके। चड्ढा ने भ्रामक विज्ञापनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कंपनियां डिब्बा बंद ड्रिंक्स पर ताजे फलों की तस्वीरें लगाती हैं, जबकि अंदर सिर्फ 'चीनी का घोल' होता है। उन्होंने इसके लिए सख्त लेबलिंग नियमों की मांग की ताकि बच्चों को मोटापे और डायबिटीज से बचाया जा सके।
बैंकों में मिनिमम बैलेंस : उन्होंने राज्यसभा में डेटा पेश करते हुए बताया कि बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहरों में लोग साल के 100 से 160 घंटे सिर्फ ट्रैफिक जाम में बिता देते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से 'नेशनल अर्बन डी-कंजेशन मिशन' शुरू करने की मांग की। उन्होंने कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए पीरियड लीव और सैनिटरी पैड्स पर से सामाजिक वर्जनाओं (Taboo) को हटाने की वकालत की। उन्होंने बैंकों द्वारा 'मिनिमम बैलेंस' न रखने पर लगाए जाने वाले भारी जुर्माने का विरोध करते हुए कहा कि 'गरीब होने के लिए उन पर जुर्माना' लगाना बंद किया जाए।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala