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भारत उत्तर कोरिया नहीं है, लोकतंत्र में विरोध अपराध नहीं, 'आत्मा' है, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा

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Rahul Gandhi statement
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मोदी सरकार पर असहमति को ‘अपराध’ बना देने का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह समझना चाहिए कि भारत उत्तर कोरिया नहीं है और जब सत्ता खुद को राष्ट्र समझने लगे तो ‘लोकतंत्र मर जाता’ है। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध अपराध नहीं, लोकतंत्र की आत्मा है तथा सवाल पूछने से लोकतंत्र मजबूत होता है। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी, ये उत्तर कोरिया नहीं, भारत है। जब सत्ता खुद को राष्ट्र समझने लगे और असहमति को दुश्मन, तब लोकतंत्र मर जाता है।’
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि यह कैसा लोकतंत्र है, जहां कंप्रोमाइज्ड पीएम सवालों से डरते है? जहां असहमति को कुचलना शासन का स्वभाव बनता जा रहा है? राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध अपराध नहीं, लोकतंत्र की आत्मा है। सवाल पूछना लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, उसकी ताकत है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सरकार आलोचना सुनती है, जवाब देती है और जवाबदेह रहती है।’’
 
 
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि आज भारत में ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ के राज में शांतिपूर्ण विरोध करना ही सबसे बड़ा 'अपराध' बना दिया गया है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को धीरे-धीरे ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है, जहां असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साज़िश बताया जाता है।
उन्होंने कहा कि सोचिए, मुद्दा कोई भी हो, अगर आप सत्ता के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो लाठी, मुकदमा और जेल, यह लगभग तय है। पेपर लीक से त्रस्त युवाओं ने अपने भविष्य के लिए आवाज उठाई, जवाब लाठियों से मिला। देश की गौरवशाली महिला पहलवानों ने भाजपा के प्रभावशाली नेता पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनकी पुकार को बदनाम किया गया, आंदोलन को कुचला गया, और उन्हें सड़कों से जबरन हटाया गया।’’
 
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, बलात्कार पीड़िता के समर्थन में इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ तो न्याय की मांग (रहे प्रदर्शनकारियों) को व्यवस्था के लिए 'असुविधा' मानकर हटा दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि युवा कांग्रेस ने देश का अहित करने वाले व्यापार समझौते का शांतिपूर्ण विरोध किया तो उन्हें ‘देशविरोधी’ बताकर गिरफ्तार कर लिया। जब आम लोग जहरीली हवा के खिलाफ खड़े हुए, तो पर्यावरण की चिंता को भी “राजनीति” कहकर दबा दिया गया।’’
 
राहुल गांधी ने दावा किया कि जब किसानों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया, तो उन्हें देशविरोधी करार दिया गया, आंसू गैस, रबर की गोलियां, पानी की बौछारें और लाठियां ही संवाद का माध्यम बना दी गईं। राहुल गांधी ने कहा कि जब आदिवासी अपने जल, जंगल, जमीन के हक के लिए खड़े हुए, तो उन पर भी शक की नज़र डाली गई, मानो अपने अधिकार मांगना अपराध हो।’’ Edited by : Sudhir Sharma

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