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Lok Sabha में भारी हंगामा, राहुल गांधी ने LPG संकट के साथ छेड़ा 'Epstein Files' का मुद्दा, स्पीकर ओम बिरला ने लगाई फटकार

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Rahul Gandhi Lok Sabha speech
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश में एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी का संकट है। छोटे व्यापारी परेशान हो रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि हम रूस से तेल क्यों नहीं ले रहे हैं। इस दौरान उन्होंने एपस्टीन फाइल का मुद्दा भी उठाया।  लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पहेली सुलझा ली है और पहेली समझौते के बारे में है। हमारे यहां एक सज्जन बैठे हैं जो ऑइल मंत्री हैं। उन्होंने खुद कहा है कि वह मिस्टर एपस्टीन के दोस्त हैं।
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इससे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उन पर नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि अभी एलपीजी पर ही बात करें। जिस मुद्दे पर नोटिस उसी पर बात करें। इस दौरान पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह ने कहा कि तनाव के चलते होर्मुद स्ट्रेट बंद है। भारत में क्रूड सप्लाई सुरक्षित है।

क्या कहा ओम बिरला 

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मेरे पास लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के देश में गैस की कमी के संबंध में दिए गए नोटिस की एक प्रति है और मैंने उन्हें उस विषय पर बोलने का अवसर दिया था लेकिन प्रतिपक्ष के ज़िम्मेदार नेता होने के बाद भी बिना नोटिस के दूसरे मुद्दों पर चर्चा करना संसद की प्रक्रियाओं और नियमों के तहत नहीं है। संसद इस तरह से नहीं चलेगी। संसद नियमों और प्रक्रियाओं के हिसाब से चलेगी। 

राहुल गांधी ने कहा- यह तो बस शुरुआत है  

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ गई है। यूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच जंग छिड़ी हुई है। इस जंग के बहुत बड़े नतीजे होंगे। दुनिया का 20% तेल जिस सेंट्रल रास्ते से आता है, यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, उसे बंद कर दिया गया है। इसका बहुत बुरा असर होगा, खासकर हम पर क्योंकि हमारे तेल और नैचुरल गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही आता है। तकलीफ तो अभी शुरू हुई है। रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं। LPG को लेकर बहुत ज़्यादा पैनिक है। यह तो बस शुरुआत है।

सबसे बड़ा सवाल भारत की ऊर्जा का  

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल भारत की ऊर्जा सुरक्षा का है, भारत के दृष्टिकोण से मूल मुद्दा यह है कि कितने भारतीय ध्वजवाहक जहाज या भारत के लिए माल ले जाने वाले कितने तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति है। आखिरकार कच्चे तेल का एक बैरल अब सौ डॉलर के करीब पहुंच रहा है। अगर मिडिल ईस्ट में लड़ाई का शांतिपूर्ण हल निकलता है तो हर कोई बहुत खुश होगा। लेकिन भारत सरकार को सबसे पहले दो बातों पर ध्यान देना चाहिए, पहला, खाड़ी देशों में रहने वाली लोगों की बड़ी आबादी की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना और यह पक्का करना कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा कमज़ोर न हो। इस मामले में सरकार को सदन में एक बहुत ही पार्दर्शी बयान देना चाहिए कि हमारे सामरिक पेट्रोलियम भंडार की क्या स्थिति है। 
Edited by : Sudhir Sharma

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