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राजस्थान में तेज हुआ ‘सेव अरावली’ आंदोलन, अशोक गेहलोत का मोदी सरकार पर बड़ा आरोप

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 (08:29 IST)
Save Aravalli Movement : अरावली पर्वत श्रंखला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से राजस्थान में सेव अरावली आंदोलन तेज हो गया है। जयपुर से उदयपुर तक कई शहरों में जमकर प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने मोदी सरकार पर अरावली को बेचने का आरोप लगाया तो भाजपा का कहना कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है। ALSO READ: अरावली: एक पहाड़ के होने या न होने से क्या फर्क पड़ता है?
 
पर्यावरणविदों ने नई परिभाषा के तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को संरक्षण से बाहर करने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे अरावली का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा खनन के लिए खुल सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
 
सुप्रीम कोर्ट ने नई खनन लीज पर रोक लगाई गई है और पूरे अरावली क्षेत्र के लिए ‘सस्टेनेबल माइनिंग मैनेजमेंट प्लान’ तैयार होने तक नई माइनिंग गतिविधि पर रोक लगा दी। केंद्र सरकार का दावा है कि इस परिभाषा से 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र संरक्षित रहेगा और केवल 0.19 प्रतिशत इलाके में ही सीमित खनन संभव है।
 
क्या अरावली में लागू होगा सरिस्का मॉडल : वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता अशोक गेहलोत ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार अरावली को ‘बचाने’ नहीं, ‘बेचने’ में लगी है। भूपेंद्र यादव जी, 'संरक्षित क्षेत्र' के नाम पर अरावली में केवल 0.19% नई माइनिंग का झूठ मत बोलिए। जून, 2025 में आप सरिस्का का 'संरक्षित क्षेत्र' बदलकर खनन शुरू करना चाहते थे। अब इसी 'सरिस्का मॉडल' पर ही भविष्य में बाकी अरावली का संरक्षित क्षेत्र बदलेगा?
 
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि मोदी सरकार दावा करती है कि सिर्फ 0.19% अरावली क्षेत्र को खनन व अन्य गतिविधियों के लिए खोला जाएगा, लेकिन 0.19% का मतलब करीब 68,000 एकड़ होता है। यह कोई छोटा क्षेत्र नहीं है और इसके टुकड़ों में बंटने से भारी पर्यावरणीय नुकसान होगा। अरावली पहले ही गंभीर नुकसान झेल चुकी है, मोदी सरकार इस नुकसान को और गहरा कर रही है।
 
इधर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी आज अरावली पर्वतमाला के मुद्दे पर जयपुर में एक बड़ी प्रेस वार्ता आयोजित कर रही है। इस दौरान कांग्रेस पार्टी अरावली पर्वतमाला को लेकर अपना पक्ष रखेगी। इस दौरान कांग्रेस अपने आंदोलन की रूपरेख भी रख सकती है। ALSO READ: क्या संकट में है अरावली के पहाड़, राजस्थान से दिल्ली तक क्यों मचा बवाल?
 
क्या है भाजपा का पक्ष : इधर भाजपा का कहना है कि अरावली हमारी धरोहर है, और अब यह पहले से भी अधिक सुरक्षित है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा दिशा-निर्देश पर्यावरण और विकास के बीच सही संतुलन स्थापित करते हैं। यह फैसला न केवल हमारी पहाड़ियों की रक्षा करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य भी सुनिश्चित करता है। वास्तविकता: संरक्षण + संतुलन = टिकाऊ भविष्य!
 
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल ने साफ कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, हमारी पहचान है। मैं सभी को विश्वास दिलाता हूं कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है। इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।
edited by : Nrapendra Gupta

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