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संचार साथी ऐप पर नहीं थमा बवाल, ऐप पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, सिंधिया ने दिया करारा जवाब

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , बुधवार, 3 दिसंबर 2025 (15:42 IST)
Sanchar Sathi APP news in Hindi : संचार साथी एप को लेकर बुधवार को भी कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों का विरोध जारी रहा। कांग्रेस ने संसद में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया। इस पर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी साफ कर दिया कि संचार साथी एप से जासूसी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है। ALSO READ: क्‍या है संचार साथी ऐप, कैसे करेगा काम और क्‍या विशेषताएं?
 
कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हु्‍ड्डा ने बुधवार को लोकसभा में संचार साथी ऐप को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सवाल है कि ऐप डिसेबल होने के बाद भी सारे फीचर्स डिसेबल हुए या नहीं- ये बात यूजर्स को पता नहीं चल पाएगी। इस पर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जवाब देते हुए कहा था कि संचार साथी एप से जासूसी संभव नहीं है। यह एप लोगों की सुरक्षा और मदद के लिए बनाया गया है।
 
सिंधिया ने कहा कि आपने अगर संसद में मेरी बात सुनी होगी तो मैंने कहा भी है कि हमारा एक ही मत है और वो मत है आम जनता की सुरक्षा। ये ऐप आम जनता को ये फ्रॉड के कैंसर से बचाने के लिए है।
 
उन्होंने कहा कि 22800 करोड़ रुपए का पिछले वर्ष फ्रॉड हुआ था। एक तरफ सब कहते हैं कि आप आम जनता को फ्रॉड से बचाए तो आम जनता को बचाने का तंत्र संचार साथी ऐप है। इसके सारे आंकड़े मैंने कल भी दिए और आज सदन में मैंने सबके समक्ष रखा इसलिए ये कदम उठाया गया है। मैंने फिर भी कहा है कि जो फीडबैक मिला है उसके आधार पर संशोधन करनी की जरूरत है तो हम लोग करने के लिए तैयार हैं। हमारा जनता की सुरक्षा ही दायित्व है। ALSO READ: संचार साथी ऐप पर सरकार का यू-टर्न, सिंधिया बोले- डिलीट करना है तो कर दो डिलीट
 
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ‘संचार साथी’ पहल पर कहा कि संचार साथी के माध्यम से पूरे देश को एक जासूसी तंत्र में बदला जा रहा है। सरकार ने हर सेलफोन निर्माता और आयातक को कहा कि हर स्मार्टफोन और सेलफोन में संचार साथी ऐप को अनिवार्य तौर से अपलोड करना पड़ेगा। सरकार ने ये भी हिदायत दी है जो मौजूदा स्मार्टफोन है उसमें सॉफ़्टवेयर अपग्रेड के माध्यम से संचार साथी ऐप को अपलोड किया जाए और संचार साथी ऐप को न अमेंड किया जा सकता है न डिलीट किया जा सकता है। तो इसका हर स्मार्टफोन और सेलफोन यूजर्स पर क्या प्रभाव है, अब सरकार हर स्मार्टफोन और सेलफोन यूजर्स के लोकेशन को ट्रैक कर सकती है, सरकार अब आपकी सारी बातचीत सुन सकती है, आपने क्या खरीदा ये पता होगा, फोटो का एक्सेस भी सरकार को होगा। अगर किसी विदेशी हैकर, विदेशी एजेंसी ने संचार साथी ऐप को हैक कर लिया तो सबका डेटा लीक हो जाएगा। ये कौन कानून के तहत किया जा रहा है। मैंने इस पर सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
 
आदेश में एपल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी मोबाइल कंपनियों को 90 दिन का समय दिया गया था। यह भी कहा गया था कि इस एप को यूजर्स डिसेबल नहीं कर सकेंगे। पुराने फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह एप इंस्टॉल किया जाएगा।
 
स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एपल ने भारत सरकार ने इन निर्देशों में मानने से मना कर दिया। कंपनी का मानना है कि इस तरह की अनिवार्यता उसके डिवाइसों की प्राइवेसी और सुरक्षा संरचना पर असर डाल सकती है। कंपनी की ग्लोबल पॉलिसी में स्पष्ट है- सरकारी या थर्ड-पार्टी एप्स को डिवाइस की बिक्री से पहले उसमें प्री-इंस्टॉल नहीं किया जा सकता। एपल iOS को क्लोज्ड सिस्टम रखती है, जहां एप स्टोर के अलावा कोई एप नहीं आ सकता। ALSO READ: Apple नहीं मानेगा मोदी सरकार का आदेश? संचार साथी ऐप की अनिवार्यता का को लेकर क्या कहा, पहले भी कर चुकी है एंटी-स्पैम एप को रिजेक्ट
 
सरकार का तर्क था कि सरकार का तर्क है कि संचार साथी एप चोरी या गुम फोन ट्रैक करने, ब्लॉक करने और उनका गलत इस्तेमाल रोकने के काम आएगा। यानी साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। संचार साथी एप की मदद से अब तक 7 लाख से ज्यादा गुम या चोरी हुए मोबाइल वापस मिल चुके हैं।
edited by : Nrapendra Gupta 

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