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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बोले – गिरफ्तारी से नहीं डरता, सत्य दबाया नहीं जा सकता

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Shankaracharya Avimukteshwaranand Magh Mela controversy
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हालिया विवादों पर चुप्पी तोड़ते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून का सम्मान करते हैं और यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आती है, तो वे किसी भी प्रकार का विरोध नहीं करेंगे। उनका कहना है कि 'सत्य' को अधिक समय तक दबाया नहीं जा सकता।
 
स्वामी जी ने कहा कि प्रयागराज में हर कोने पर प्रशासन ने CCTV लगाए हैं। अगर कोई घटना हुई है, तो वह 'वॉर रूम' के रिकॉर्ड में होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लड़कों का नाम विवाद में घसीटा जा रहा है, वे कभी उनके गुरुकुल के छात्र नहीं रहे। मार्कशीट के अनुसार वे हरदोई के एक स्कूल के छात्र हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ लोग हिंदू का चोला पहनकर सनातन धर्म को भीतर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मामला

प्रयागराज पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले पास्को एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है। ALSO READ: महाराछ है अविमुक्तेश्वरानंद, 20 बच्चों से किया कुकर्म, आशुतोष महाराज ने वीडियो जारी कर लगाए आरोप
 
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे। कोर्ट ने पुलिस को स्पष्ट आदेश दिया है कि एफआईआर दर्ज कर इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाए।

क्या है शंकराचार्य से जुड़ा माघ मेला विवाद 

मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य और उनके अनुयायियों ने पालकी में बैठकर संगम में स्नान का प्रयास किया। प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा कारणों से इसे रोक दिया था। पुलिस ने उनसे कहा कि उन्हें पैदल ही आगे बढ़ना चाहिए। रोकते समय कुछ स्थानों पर शंकराचार्य के अनुयायियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और तनाव बढ़ा। शंकराचार्य ने इसे अनुचित रोकथाम और अपमान बताया। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई अपमान नहीं किया गया। केवल भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा तथा नियमों के कारण ऐसा किया गया। 
 
मुझसे गंगा स्नान का मेरा जन्मसिद्ध अधिकार छीना जा रहा है। क्या अब साधु-संतों को गंगा स्नान के लिए भी सरकार से अनुमति लेनी होगी? यह संतों का अपमान है। इस घटना के बाद वे बिना अन्न-जल ग्रहण किए धरने पर बैठ गए थे। इस बीच, प्रशासन ने उन्हें नोटिस भी जारी किया।
edited by : Nrapendra Gupta 

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