ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) January 22, 2026
हमें उनसे सावधान रहना होगा... pic.twitter.com/AgyHSj39Ti
कालनेमि का उल्लेख रामायण में मिलता है। कालनेमि रावण का विश्वस्त अनुचर था। वह एक मायावी राक्षस था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी। बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन उसका उद्देश्य भगवान राम के कार्य में बाधा डालना था।
यह भयंकर मायावी और क्रूर था। इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक थी। रावण ने इसे एक बहुत ही कठिन कार्य सौंप दिया था। राम-रावण युद्ध में शक्ति लगने से लक्ष्मण बेहोश हो गए थे। तब हनुमान जी को संजीवनी लाने का कहा गया था। हनुमानजी जब द्रोणाचल की ओर चले तो रावण ने उनके मार्ग में विघ्न उपस्थित करने के लिए कालनेमि को भेजा।
कालनेमि ने अपनी माया से तालाब, मंदिर और सुंदर बगीचा बनाया और वह वहीं एक ऋषि का वेश धारण कर मार्ग में बैठ गया। हनुमानजी उस स्थान को देखकर वहां जलपान के लिए रुकने का मन बनाकर जैसे ही तालाब में उतरे तो तालाब में प्रवेश करते ही एक मगरी ने अकुलाकर उसी समय हनुमानजी का पैर पकड़ लिया। हनुमानजी ने उसे मार डाला। फिर उन्होंने अपनी पूंछ से कालनेमि को जकड़कर उसका वध कर दिया।
edited by : Nrapendra Gupta