नई दिल्ली: लद्दाख के प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की गिरफ्तारी और उन पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में माहौल गरमा गया है। सोमवार और मंगलवार (2-3 फरवरी 2026) को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने वांगचुक पर अब तक के सबसे गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्र का दावा है कि वांगचुक 'जेन ज़ी' (Gen Z) यानी युवा पीढ़ी को उकसाकर लद्दाख में वैसी ही अस्थिरता पैदा करना चाहते थे, जैसी हाल ही में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में देखी गई है।
'गांधीजी का मुखौटा और भीतर खौफनाक इरादे' : केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ के सामने दलील दी कि वांगचुक ने अहिंसा का केवल दिखावा किया। मेहता ने कहा:" वांगचुक के भाषणों की शुरुआत और अंत में हमेशा महात्मा गांधी का नाम होता है, लेकिन बीच में वह जो कुछ कहते हैं, वह विशुद्ध रूप से भड़काऊ है। उन्होंने गांधीजी को एक 'ढाल' या 'मुखौटे' के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह युवाओं को गृहयुद्ध (Civil War) और आत्मदाह के लिए उकसा सकें।
"लद्दाख को बांग्लादेश बनाना चाहते थे' : सरकार ने अदालत को बताया कि वांगचुक ने जानबूझकर 'अरब स्प्रिंग' (Arab Spring) जैसे आंदोलनों का जिक्र किया, जिन्होंने कई देशों की सरकारों को उखाड़ फेंका था। मेहता ने तर्क दिया कि एक रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती इलाके (लद्दाख) में "हमारा" और "उनका" कहना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
प्रमुख दलीलें/दावे : केंद्र सरकार (SGI तुषार मेहता) वांगचुक ने युवाओं को नेपाल और बांग्लादेश जैसी हिंसा के लिए उकसाया। वह लद्दाख में 'सेपेरेटिस्ट' (अलगाववादी) भावनाएं भड़का रहे हैं। वांगचुक का पक्ष (कपिल सिब्बल) सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है। वांगचुक ने हमेशा शांति की अपील की है और उनके खिलाफ हिंसा का कोई सबूत नहीं है। हिरासत का आधार सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसा, जिसमें 4 लोगों की मौत हुई थी। सरकार ने इसके लिए वांगचुक के भाषणों को जिम्मेदार माना है।
क्या है पूरा मामला : सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं। सितंबर 2025 में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। वर्तमान में वह राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनकी पत्नी, गीतांजलि जे. आंग्मो ने इस हिरासत को 'अवैध और राजनीति से प्रेरित' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुखसुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या वांगचुक की हिरासत के लिए पेश किए गए सबूत (वीडियो और भाषण) वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इतना बड़ा खतरा थे कि उन पर एनएसए लगाया जाए। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जोर देकर कहा कि "शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना कोई अपराध नहीं है।" इस मामले में दलीलें अभी जारी हैं और आने वाले दिनों में कोर्ट का फैसला लद्दाख के भविष्य और अभिव्यक्ति की आजादी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगा।
Edited By: Naveen R Rangiyal