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एक हफ्ते के अंदर सेवा में लौटेगा सुखोई-30

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, शुक्रवार, 14 नवंबर 2014 (22:59 IST)
नई दिल्ली। भारत का अग्रणी लड़ाकू विमान सुखोई-30 ‘एक हफ्ते के अंदर’ सेवा में लौटेगा। पुणे के नजदीक दुर्घटना के बाद इसे अस्थायी रूप से सेवा से हटा दिया गया था। यह जानकारी वायुसेना प्रमुख अरूप राहा ने आज दी। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के कारणों के लिए गठित कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के निष्कर्ष को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
 
वर्ष 2009 के बाद यह सबसे लंबा समय है जब रूस निर्मित लड़ाकू बेड़े को सेवा से हटाया गया है। दुर्घटना के बाद करीब तीन हफ्ते के लिए इसे सेवा से हटाया गया।
 
राहा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘यह (14 अक्टूबर को पुणे में हुई दुर्घटना) एक दुर्घटना थी, जो सीट में आई खामी के कारण प्रतीत होती है। कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी पूरी होने वाली है और निष्कर्ष को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जल्द ही हमारे पास परिणाम आएंगे और हम जल्द ही विमान को परिचालन में लाने जा रहे हैं।’ 
 
उन्होंने कहा कि ‘प्रारंभिक जांच’ से पता चलता है कि हम कारण ढूंढने में सफल रहे हम ‘बिना ज्यादा समस्या के इससे निजात पा लेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे काफी उम्मीद है कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी जल्द खत्म होगी और हम इस बेड़े को फिर से उड़ा सकेंगे और स्थिति सामान्य होगी।’ 
 
यह पूछने पर कि सुखोई विमानों के उड़ने में कितना वक्त लगेगा, उन्होंने कहा, ‘एक हफ्ते के अंदर हम इस विमान को उड़ाने लगेंगे।’ रूस द्वारा बिक्री बाद सहयोग के मुद्दे पर वायुसेना प्रमुख ने कहा कि एसयू-30 ‘बड़ी एवं जटिल परियोजना’ है, जिसके तहत रूस 270 से ज्यादा विमानों को ले रहा है।
 
वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘निश्चित रूप से वायुसेना विमान को अंतिम रूप देने में शामिल रही थी। इसमें काफी कुछ हमारी तरफ से है, देसी एवं अन्य स्रोत हैं, इसलिए यह बड़ी परियोजना है, जटिल परियोजना है।’
 
राहा ने कहा कि विमान की अच्छी अभियान क्षमता है लेकिन कल-पुर्जे की आपूर्ति का मुद्दा है, जिससे निपटा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘कोई भी उपकरण जो आप खरीदते हैं जो देसी हो या बाहर का हो, इसकी अपनी समस्याएं होती हैं और मुद्दे होते हैं। जो भी आप बता रहे हैं उनसे निपटा जा रहा है।’ उनसे रूस द्वारा बिक्री के बाद उपयुक्त सहायता मिलने और मरम्मत सुविधाओं के निर्माण में काफी विलंब के बारे में पूछा गया था।
 
राहा ने कहा कि वायुसेना रूस के अधिकारियों और एचएएल से बात कर रही है। एचएएल भी विमान के लाइसेंस उत्पादन और रखरखाव के काम में शामिल है।
 
उन्होंने कहा, ‘ये सभी जटिल प्रक्रिया है। इसमें न केवल तकनीक बल्कि वित्त भी शामिल है, लेकिन इनका समाधान किया जा रहा है। मैं नहीं कहता कि हर चीज ठीक है लेकिन चीजों पर काम हो रहा है। काफी प्रगति है।’(भाषा)

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