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Digital Arrest मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI को पहचान का आदेश; ₹54 हजार करोड़ की ठगी को बताया 'डकैती'

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Digital Arrest News : डिजिटल धोखाधड़ी और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को ऐसे मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और दिल्ली सरकारों को आदेश दिया है कि चिन्हित मामलों में जांच की अनुमति तत्काल प्रदान की जाए। 
 
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल फ्रॉड को देश के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि डिजिटल माध्यम से अब तक 54,000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम की ठगी की जा चुकी है, जो किसी भी तरह से सामान्य अपराध नहीं बल्कि पूरी तरह से लूट या डकैती के समान है।

चार हफ्तों में एमओयू का मसौदा तैयार करने का निर्देश

 
शीर्ष अदालत ने डिजिटल धोखाधड़ी से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर दिया। न्यायालय ने आदेश दिया कि इस संबंध में संबंधित एजेंसियां चार सप्ताह के भीतर एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) का मसौदा तैयार करें, ताकि विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।
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कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और समन्वय मजबूत नहीं होगा, तब तक डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
 
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों पर विशेष चिंता जताई, जिनमें साइबर ठग खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे मोटी रकम ऐंठ लेते हैं। अदालत ने कहा कि आम नागरिकों को भयभीत कर की जा रही यह ठगी बेहद गंभीर अपराध है और इससे सख्ती से निपटना जरूरी है।
 
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के दौरान CBI, राज्य सरकारों, RBI और अन्य एजेंसियों से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब करने के संकेत दिए हैं। अदालत के इस सख्त रुख को डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।  Edited by: Sudhir Sharma

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