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Supreme Court का बड़ा फैसला, 10 डेंटल कॉलेज भरेंगे 100 करोड़ जुर्माना, जानिए क्‍या है मामला...

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हमें फॉलो करें Supreme Court has taken a major decision regarding private dental colleges in Rajasthan

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

नई दिल्ली , शनिवार, 20 दिसंबर 2025 (20:36 IST)
Fines imposed on private dental colleges : उच्‍चतम न्‍यायालय ने प्राइवेट डेंटल कॉलेजों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। न्‍यायालय ने राजस्थान के 10 प्राइवेट डेंटल कॉलेजों पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इन कॉलेजों ने नियमों को ताक पर रखकर एडमिशन दिया था। अदालत ने राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर 10-10 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है, जिन्होंने 2016-17 शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम NEET पात्रता अंक पूरे न करने वाले छात्रों को दाखिला दिया था। न्‍यायालय ने राजस्थान सरकार को भी 10 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया है।

खबरों के अनुसार, मेडिकल और डेंटल एजुकेशन में नियमों की अनदेखी पर उच्‍चतम न्‍यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्‍यायालय ने राजस्थान के 10 डेंटल कॉलेजों को करारा झटका देते हुए उनपर 10-10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इन कॉलेजों ने नियमों को ताक पर रखकर एडमिशन दिया था।
अदालत ने राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर 10-10 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना लगाया है, जिन्होंने 2016-17 शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम NEET पात्रता अंक पूरे न करने वाले छात्रों को दाखिला दिया था। इस मामले ने न केवल कॉलेज प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े किए, बल्कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी।
 
उच्‍चतम न्‍यायालय ने स्पष्ट कहा कि बिना निर्धारित NEET अंक के छात्रों को प्रवेश देना नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। उच्‍चतम न्‍यायालय के जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित कॉलेजों ने नियमों का उल्लंघन जानबूझकर किया और इसलिए वे सख्त सजा के हकदार हैं।
उच्‍चतम न्‍यायालय ने राजस्थान सरकार को भी 10 लाख रुपए जमा करने का निर्देश दिया है। जबकि जुर्माने की 100 करोड़ रुपए की राशि समाज कल्याण में इस्तेमाल होगी। उच्‍चतम न्‍यायालय ने आदेश दिया कि डेंटल कॉलेजों से वसूले गए कुल 100 करोड़ रुपए को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए।
हालांकि उच्‍चतम न्‍यायालय ने मानवीय आधार पर 2016-17 में दाखिला पाए छात्रों को राहत दी। अदालत ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उनकी बीडीएस डिग्री को वैध (रेग्युलराइज) कर दिया। जिन छात्रों को राहत मिली है, उन्हें निर्देश दिया है कि वे राजस्थान हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करें।
Edited By : Chetan Gour

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