Publish Date: Tue, 19 May 2026 (11:07 IST)
Updated Date: Tue, 19 May 2026 (12:32 IST)
आवारा पशुओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला देते हुए कहा कि आवारा कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों को काट रहे है, हम इस पर आंख नहीं मूंद सकते। गंभीर रूप से बीमार, खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार हो। शीर्ष अदालत ने स्कूल, अस्पताल, हाईवे और एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा जानवरों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं।
शेल्टर होम में रहेंगे आवारा कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों आदि जैसे सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने नवंबर 2025 के आदेश में संशोधन करने से इनकार कर दिया है। सार्वजनिक स्थानों से अधिकारियों द्वारा पकड़े गए आवारा कुत्तों को अब शेल्टर होम में ही रखा जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट हमारे फैसले को सुनिश्चित करें।
एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल का पालन करें
शीर्ष अदालत ने कहा कि सार्वजनिक परिसरों से आवारा पशुओं को बाहर करें। हाईवे से भी आवारा पशुओं को हटाया जाए। हर शहर के बाहर इसके लिए सेंटर हो। राज्यों ने 7 अक्टूबर के आदेश का पालन नहीं किया। एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल का पालन नहीं किया गया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जो अधिकारी इन आदेशों को लागू करने में विफल रहेंगे, उनके खिलाफ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
विदेशी पर्यटकों को भी कुत्ते ने काटा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने कहा कि छोटे बच्चों को नोचा गया, बुजुर्गों पर हमले हुए। आईजीआई एयरपोर्ट पर डॉग बाइटिंग की 31 घटनाएं हुई। विदेशी पर्यटकों को भी कुत्ते ने काटा।
अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा, 'आवारा कुत्तों के मामले पर बहुत महत्वपूर्ण फैसला आया है। एक अच्छा कदम है। आर्टिकल 21 में यह बहुत जरूरी माना गया है कि बुजुर्गों और बच्चों का बिना किसी के डर के कहीं भी जाना महत्वपूर्ण है। यह बताया गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में डॉग बाइट के केस हुए हैं। समाज में लोग बिना किसी डर के रह सके इसलिए हम इन चीज़ों को सुनिश्चित कर रहे हैं। यह सही दिशा में लिया गया कदम है। ABC प्रोग्राम को लागू करने की बात की गई है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, पीड़ितों, कुत्तों के पक्ष में शामिल लोग, पशु कल्याण बोर्ड और भारत सरकार की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
edited by : Nrapendra Gupta
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