Swami Avimukteshwaranand Saraswati : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रेसवार्ता में कहा कि उन्होंने अपनी बात पहले ही सार्वजनिक रूप से रख दी थी। इसके बावजूद देर रात प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ उनके शिविर में पहुंचा और नोटिस चस्पा कर दिया। उन्होंने बताया कि शिविर की ओर से प्रशासन से अनुरोध किया गया था कि नोटिस सुबह 9 बजे आकर दिया जाए, लेकिन खुद को कानूनगो बताने वाले व्यक्ति ने नोटिस रिसीव न होने पर उसे चस्पा कर दिया और वहां से चले गए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्होंने अपने नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लगाया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज मेला प्राधिकरण जिस तत्परता से यह कार्रवाई कर रहा है, वह कई सवाल खड़े करती है।
इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ देकर यह प्रश्न उठाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को शंकराचार्य कैसे लिख सकते हैं। अधिवक्ता ने बताया कि पूर्व में अदालत में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को शंकराचार्य घोषित किए जाने का उल्लेख था। हालांकि, फर्जी हलफनामा दाखिल कर उन्हें अयोग्य घोषित करने का प्रयास किया गया।
वकील ने यह भी कहा कि माघ मेले में इस समय लगभग 15 ऐसे शंकराचार्य मौजूद हैं, जिन्हें प्रशासन की ओर से सभी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहा है।
अधिवक्ता ने बताया कि 12 सितंबर 2022 को विधिवत पट्टा अभिषेक संपन्न हो चुका है, जिसमें चादर और तिलक की रस्में भी पूरी की गई थीं। वर्ष 2023 में शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जो अभी लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि वासुदेवानंद सरस्वती ने अदालत में झूठा हलफनामा प्रस्तुत किया है। प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है, उसमें कहीं यह नहीं लिखा है कि शंकराचार्य शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि माघ मेले में कोई पट्टा अभिषेक नहीं किया जा रहा है। केंद्र सरकार भी इस मामले में अदालत में पक्षकार है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह नोटिस उन्हें इसलिए दिया गया है क्योंकि वे लगातार गौहत्या बंद करने की मांग उठा रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस पूरे प्रकरण को लेकर उनकी ओर से भी प्रशासन को एक नोटिस भेजा जाएगा।
Edited By : Chetan Gour