Tej Pratap Yadav Makar Sankranti feast: बिहार की संस्कृति और राजनीति में मकर संक्रांति का बहुत महत्व है। पटना की सड़कों पर आज एक ऐसी ही तस्वीर देखने को मिली, जिसने सबको चौंका दिया। 7 महीने पहले जिस बेटे तेजप्रताप यादव को को लालू यादव ने पार्टी और घर से बाहर का रास्ता दिखाया था, आज यानी मकर संक्राति को तेजप्रताप के घर आयोजित भोज में लालू यादव भी नजर आए। माना जा रहा है कि तेज प्रताप को लेकर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की नाराजगी दूर हो गई है।
दरअसल, 90 के दशक में लालू यादव ने बिहार में चूड़ा-दही भोज की जो परंपरा शुरू की थी, वह आज भी राज्य की राजनीति का थर्मामीटर मानी जाती है। इस बार लालू यादव ने अपने घर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन नहीं किया था, लेकिन उनके छोटे बेटे ने यह आयोजन किया था।
कौन-कौन शामिल हुआ भोज में : लालू यादव के साथ ही आयोजन में बिहार के राज्यपाल आरफि मोहम्मद खान, आरएलजेपी प्रमुख पशुपति पारस, जदयू विधायक चेतन आनंद, तेज प्रताप यादव के मामा साधु यादव और प्रभुनाथ यादव भी इस भोज में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि बिहार चुनाव से पहले लालू यादव ने अपने छोटे बेटे तेजप्रताप को घर और पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद तेजप्रताप ने बागी रुख अपनाते हुए जनशक्ति जनता दल के नाम से नई पार्टी बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि इस बार वे खुद भी चुनाव हार गए।
...जब असहज हुए लालू यादव : हालांकि महीनों की तल्खी के बाद जब राजद सुप्रीमो लालू यादव जब अपने बड़े बेटे के घर पहुंचे, तो नजारा भावुक कर देने वाला था। इस दौरान लालू की आंखों पर सीधी धूप पड़ रही थी, जिसे देख वह असहज भी हुए। पिता को धूप से बचाने के लिए तेजप्रताप फौरन सक्रिय हुए और एक सहयोगी से गमछा मंगाकर लालू के सिर पर रखवाया ताकि उन्हें धूप से राहत मिल सके। हालांकि सियासी गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
तेज प्रताप ने इस भोज के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर नेता प्रतिपक्ष और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव और एनडीए के दिग्गज मंत्रियों और नेताओं को भी न्योता भेजा था। यह भी कहा जा रहा है कि तेजप्रताप ने इस भोज के जरिए एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की। एक तरफ परिवार की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया है, वहीं दूसरी ओर वे एनडीए से करीबी बढ़ाने की कोशिश भी कर रहे हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala