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कई साल से नजर अंदाज हो रहे किराएदार संबंधी जानकारी के आदेश

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हमें फॉलो करें Tenant information orders that have been ignored for several years
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सुरेश एस डुग्गर

जम्मू, 25 दिसम्बर। सांबा जिले के प्रशासन ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए एक बार फिर मकान मालिकों, संपत्ति मालिकों, उद्योगों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ठेकेदारों के लिए जिले में काम करने वाले या रहने वाले बाहरी लोगों का विवरण देना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है।

यह आदेश सांबा जिला मजिस्ट्रेट आयुषी सूदन ने जम्मू और कश्मीर किरायेदारी अधिनियम, 2025 के अनुपालन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत जारी किया।

इससे पहले भी दो बार ऐसा आदेश जारी हो चुका है और नतीजा शून्य है। दरअसल प्रशासन ने सीमा सुरक्षा बल द्वारा पहले उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास कुछ बाहरी परिवारों की बस्तियों के बारे में बताया गया था, जिन्होंने कृषि भूमि किराए पर ली थी और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल होने का संदेह था।

सांबा और जम्मू जिलों के उपायुक्तों द्वारा पुलिस के निवेदन पर कई बार इन जिलों में रह रहे किराएदारों का सत्यापन करवाने और तीन दिनों के भीतर ऐसा न करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई करने की चेतावनी दी जा चुकी है। इन आदेशों की सच्चाई यह है कि पिछले 10 सालों के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा ऐसे कितने आदेश निकाले जा चुके हैं अब दोनों को भी शायद याद नहीं हैं।

अगर देखा जाए तो साल में दो से तीन बार ऐसा आदेश निकाला जा रहा है। पर किराएदारों के सत्यापन करवाने वालों का आंकड़ा एक से दो परसेंट से आगे ही नहीं बढ़ पाया है।

दरअसल ऐसा न कर पाने वालों पर भारतीय संविधान की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जो चेतावनी दी गई है उसमें अधिकतम जुर्माना 200 रूपया है। ताजा घटनाक्रम में सांबा व जम्मू के उपायुक्तों द्वारा ऐसा ही एक आदेश जारी किया गया। पर वे इसके प्रति चुप्पी साधे हुए हैं कि इतने सालों से इस आशय के जो आदेश निकाले गए उनका परिणाम क्या हुआ। कितने डिफाल्टरों के विरूद्ध कार्रवाई की गई कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 
जम्मू में किराएदारों का सत्यापन करने की आवश्यकता पुलिस ने वर्ष 2014 में उस समय महसूस की थी जब एक आतंकी कमांडर अब्दुल्ला कारी शहर के बीचोंबीच जानीपुर इलाके में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। वह उस मकान में कई महीनों से किराए पर रह रहा था।

सिर्फ अब्दुल्ला कारी ही नहीं बल्कि उसके बाद के वर्षों में भी किराएदारों के तौर पर रह रहे कई आतंकी मारे गए। कई आतंकी पकड़े गए और कई ओवर ग्राउंड वर्कर भी दबोचे गए। हर घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने किराएदारों के सत्यपान करवाने का फरमान तो जारी किया पर डिफाल्टरों के विरूद्ध कोई कार्रवाई न होने के कारण ही मकान मालिकों ने इसे बहुत ही हल्के तौर पर लिया। यह अभी भी जारी है। एक अधिकारी के बकौल, अगर मकान मालिकों ने पहले के आदेशों को गंभीरता से लिया होता तो हर छह महीनों के बाद ऐसा फरमान जारी करने की नौबत ही नहीं आती।
Edited By: Navin Rangiyal 

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