मनरेगा के नाम पर बढ़ा राजनीति का AQI, गांधी होते तो कहते हे राम... नाम की महिमा पर दिल्ली में घमासान
शशि थरूर हुए शायरना, शिवराज सिंह ने यूं दिया जवाब
कभी- कभी शेक्सपीयर की समझ पर भी संशय होता है— आखिर क्या सोचकर शेक्सपीयर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है— भारत में तो नाम की ही महिमा है। नाम के बगैर यहां पत्ता तक नहीं हिलता। यहां सबसे ज्यादा विवाद और चर्चाएं नाम पर ही होते हैं। नाम और सरनेम में सबसे ज्यादा दिलचस्पी भारत में ही ली जाती है। यहां तक कि हमारे भारतीय दर्शन में भी नाम की महिमा बताई गई है। प्रभु राम के बारे में कहा गया है कि राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट।
किसी सरकारी योजना का नाम हो या शहर, किसी सड़क और गली का नाम हो। आए दिन नामों को लेकर सत्ता के गलियारों में राजनीति भभका मारती है। इन दिनों दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा को लेकर दिल्ली में संसद में अंगार लगी है।
प्रियंका गांधी समेत गांधी का नाम हटाने पर कांग्रेसी गुस्से में हैं। तो मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने अंदाज में कांग्रेस को जवाब दिया है। वहीं कांग्रेस नेता शशि थरूर इस विवाद को लेकर शायराना हो गए हैं।
कुल मिलाकर दिल्ली में मनरेगा के नाम पर राजनीति का AQI बढ़ गया है। अगर इस वक्त महात्मा गांधी होते तो कहते.. हे राम... आखिर नाम की महिमा पर दिल्ली से लेकर देशभर में क्यों मचा है ये घमासान।
क्यों उठा नाम का विवाद : दरअसल, केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 को निरस्त कर एक नया कानून लाने का प्रस्ताव रखा है। इस नए विधेयक का नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) विधेयक, 2025' है, जिसे लोकसभा में 15 दिसंबर 2025 को सर्कुलेट किया गया और शीतकालीन सत्र में पेश किया जाना है। अब इस योजना के नाम को लेकर केंद्र की राजनीति में बयानबाजी का एक्यूआई जबरदस्त बढ़ा हुआ है।
क्या कहा प्रियंका गांधी ने : कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने महात्मा गांधी का नाम हटाने पर सवाल उठाते हुए कहा, "योजना का नाम बदलने से कार्यालयों, स्टेशनरी आदि में बदलाव पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इसका क्या फायदा? महात्मा गांधी दुनिया के सबसे सम्मानित नेता हैं, उनका नाम हटाने का उद्देश्य क्या है? यह समय और पैसे की बर्बादी है।" प्रियंका ने नये बिल को संविधान की स्पिरिट के खिलाफ बताया। प्रियंका ने कहा 'मनरेगा कानून की जगह जो नया बिल लाया गया है, उससे ग्रामीण वर्कर्स को काम का जो अधिकार मिला हुआ है, वह कमजोर होगा। यह बिल संविधान की स्पिरिट के खिलाफ है'
शशि थरूर हुए शायराना : पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी संसद में बिल का विरोध किया। उन्होंने शायराना अंदाज़ में कहा, 'देखो दीवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम मत करो' थरूर ने भी महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाने पर आपत्ति जताई और बिल को स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग का समर्थन किया।
गांधी का अपमान : तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने इसे "महात्मा गांधी का अपमान" करार दिया और कहा, "ये वही लोग हैं जो गांधीजी के हत्यारे की पूजा करते हैं। वे गांधीजी को इतिहास से मिटाना चाहते हैं।"
शिवराज सिंह चौहान दिया जवाब : महात्मा गांधी का नाम हटाने के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जवाब देते हुए कहा, 'बापू हमारे दिलों में बसते हैं। हम बापू का नाम हटाकर किसी का अनादर नहीं कर रहे' शिवराज सिंह चौहान ने उदाहरण देते हुए कहा, 'पहले कांग्रेस जवाहर रोजगार योजना लाई थी, बाद में जवाहरलाल नेहरू का नाम हटा दिया गया। इसका मतलब यह नहीं कि कांग्रेस नेहरू का सम्मान नहीं करती'
संसद भवन की पोर्च पर चढ़े कांग्रेसी : गांधी का नाम योजना से हटाने के विरोध में मंगलवार को कांग्रेसी नेता संसद भवन के पोर्च पर चढ़े गए और नए नाम का विरोध किया। समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, 'सपा इस बिल का पुरजोर विरोध करती है। इस बिल के जरिए केंद्र सरकार अपना बोझ कम कर रही है। NCP सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, 'नाम बदलने से कुछ नहीं होगा। हम बदलाव के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बदलाव उचित होने चाहिए।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल