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गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइट क्लब में धधकी आग ने 25 लोगों की जान ले ली। इस मामले की जांच की जा रही है। लेकिन जिस वक्त क्लब में आग लगी और जैसे ही लूथरा भाइयों को इस बारे में भनक लगी, वे भाग निकले। बताया जा रहा है कि क्लब के मालिक लूथरा ब्रदर्स इंडिगो में विमान में सवार होकर थाईलैंड फरार हो गए।
सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा को भारत इंटरपोल के जरिए ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी कराकर पकड़ने के प्रयास में है। हालांकि चर्चा है कि दोनों भाई दुबई भाग सकते हैं। कहा ये भी जा रहा है कि सौरभ और गौरव का दुबई में भी घर है। परिवार के कुछ लोग भी वहां रहते हैं। अब सवाल यह है कि अगर दोनों भाई दुबई भाग गए तो उन्हें वापस भारत लाना कितना पैचिदा काम होगा।
प्रत्यर्पण आसान काम नहीं : भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन किसी आरोपी को लाना आसान काम नहीं है। भारत और यूएई के बीच प्रत्यर्पण संधि पर 25 अक्टूबर 1999 को दस्तखत हुए थे और 29 मई 2000 से यह लागू हो चुकी है। मतलब यह है कि दोनों देश इस संधि से बंधे हैं और कानूनी रूप से एक-दूसरे के यहां मौजूद भगोड़ों को प्रत्यर्पित कर सकते हैं।
आखिर कैसे होगा प्रत्यर्पण : बता दें कि प्रत्यर्पण संधि के कुछ नियम हैं और इन्हीं के अनुरूप किसी अपराधी का प्रत्यर्पण हो सकता है। प्रत्यर्पण के लिए भारत को पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा, तभी उसके आवेदन पर विचार किया जा सकता है। प्रत्यर्पण सिर्फ एक साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों के आरोपियों का ही सकता है। इस संधि का अनुच्छेद 2 कहता है कि प्रत्यर्पण सिर्फ उन्हीं मामलों में हो सकता है, जो दोनों देशों के कानून में अपराध हों। लूथरा भाइयों पर गंभीर लापरवाही से मौत और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे आरोप हैं। ये भारत और यूएई दोनों देशों में क्राइम की कैटिगरी में आते हैं।
इतना तो साफ है कि लूथरा भाई अगर यूएई में गिरफ्तार होते हैं तो उनका भारत प्रत्यर्पण हो सकता है। लेकिन कई कानूनी पेच हैं। इसी की वजह से कहा जा सकता है कि लूथरा भाइयों को दुबई से भारत लाना आसान नहीं होगा।
Edited By: Navin Rangiyal