इंदौर के भागीरथपुरा की मेन रोड पर शवों पर फेंकने के बाद बिखरे फूल इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां से अब तक 8 अर्थियां निकल चुकी हैं। इंदौर के सफाईकर्मी सड़क साफ करते हैं तो कुछ ही देर में फिर सड़क पर अंतिम यात्रा के फूल बिखरे नजर आते हैं। इंदौर प्रशासन 8 मौतें स्वीकार कर चुका है।
ईश्वर न करे कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में अब कोई आम आदमी दूषित पानी पीकर मरे, लेकिन इस इलाके के गली-कूचे और घरों में सुबकते डरे- सहमे लोग बता रहे हैं कि कम से कम 15 लोगों की जानें चली गईं है। कई अस्पतालों में भर्ती हैं। कई गंभीर हैं। कुछ अस्पतालों से डिस्चार्ज होकर घर तो आ गए हैं, लेकिन उनकी हालत अभी ठीक नहीं है। खौफ का आलम यह है कि इस क्षेत्र में लोग पानी पीने से डर रहे हैं। अब तक 8 लोगों की मौत तो हो चुकी है, लेकिन अगर नगर निगम और जिला प्रशासन अगर जिंदा लोगों की सुध ले लेगा तो इंदौर की जनता पर उपकार होगा।
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गंदे पानी का संक्रमण इतना ज्यादा कि इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रहे लोग
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भागीरथपुरा के कई घरों में उल्टी दस्त की हो रही शिकायत
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इलाज में गरीबों के खर्च हुए 50 हजार से एक लाख रुपए
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कई गलियों में भयंकर गंदगी, चेंबर का पानी घुस रहा घरों में
बदहवास लोगों ने बयां किया दर्द : भागीरथपुरा के वार्ड नंबर 11, जोन 4 में जब दूषित पानी से हुईं मौतों की पड़ताल करने के लिए
वेबदुनिया की टीम पहुंची तो इस हादसे से बदहवास हुए लोगों ने अपने दर्द और शिकायतों का अंबार लगा दिया। इस दौरान नगर निगम प्रशासन की लापरवाही का काला सच सामने आया। पता चला कि कोई ऐसा घर नहीं, जहां बच्चे, बूढ़े और महिलाएं बीमार न हों। कहीं कहीं तो पूरे घर के ही सदस्य जहरीले पानी का शिकार हो गए हैं और घर में ताला लगाकर अस्पताल में भर्ती हैं।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का क्षेत्र : बता दें भागीरथपुरा विधानसभा क्षेत्र- 1 में आता है और यह भाजपा विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का क्षेत्र हैं। 19 दिसंबर से भागीरथपुरा में नर्मदा वाटर सप्लाय से दूषित पानी आने लगा था, इसके बाद से ही लोग अस्पतालों में भर्ती होने लगे थे। कई लोगों ने घर में ही दवाइयां ली और बोतलें चढ़वाई। जब बात समझ में आई तो इसे लेकर कई बार वार्ड नंबर 11 के पार्षद कमल वाघेला को शिकायत की गई, लेकिन किसी ने आकर झांका तक नहीं। वेबदुनिया ने पार्षद से बात की।
40 प्रतिशत काम बचा है : हमने यहां की ड्रेनेज और नर्मदा दोनों की लाइन 60 प्रतिशत क्षेत्र में बदल दी है। 40 प्रतिशत काम और बचा है। यहां तो मोहन नेता की गली में तो नर्मदा की नई लाइन है। दूसरे इलाकों में भी बचा हुआ काम जल्दी ही करवाएंगे।-
कमल वाघेला, पार्षद, वार्ड नंबर 11, भागीरथपुरा इंदौर।
टेंकर नहीं, सप्लाय नहीं, पानी कहां से पीएं : दूषित पानी पीने से लगातार बीमार हुए लोग जब अस्पताल में भर्ती हुए तो नर्मदा पानी का सप्लाय रोक दिया गया। यहां निगम ने एनाउंस किया कि सप्लाय किया जा रहा पानी न पिये। लोगों ने बताया कि निगम ने पानी पीने से तो मना कर दिया, लेकिन यहां टेंकर ही नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पानी कहां से लाए और पिये।
कोई नहीं आया देखने के लिए : रहवासी हर्ष नंदिनी ने बताया कि हमारी इस गली में कई लोग बीमार हैं, लेकिन अब भी न साफ पानी मिल रहा है, न पार्षद और न ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव देखने या जांच करने आए हैं। अब भी लोग घरों में बीमार पड़े हैं। मेरी सासू मां मरते मरते बची हैं। उन्हें आज ही अस्पताल से डिस्चार्ज करवाया है।
मेरे दोनों बच्चे मर जाते तो : रहवासी रूपनारायण तिवारी ने बताया कि मेरे दोनों बच्चे बीमार हो गए थे, अस्पताल में भर्ती करवाया। आज ही डिस्चार्ज होकर आए हैं। मेरे दोनों बेटों की मौत हो जाती तो कौन जिम्मेदार होता। कीड़े-मकोड़े वाला पानी आ रहा है। कई बार पार्षद को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। न ही अब कोई देखने सुनने आ रहा है हमारी।
इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रहे : दरअसल, जहरीले पानी का संक्रमण इतना ज्यादा हुआ है कि इलाज के बाद भी लोग ठीक नहीं हो रहे हैं।
गुड्डो बाई ने बताया कि उनके घर में तीन लोग बीमार हुए हैं। तीन दिन तक दवाई ली और बोतल लगाई है। मोहल्ले के हर घर में लोग बीमार है। कई लोग भर्ती हैं। कई गंभीर रूप से बीमार है। उल्टी दस्त इतना ज्यादा है कि इलाज के बाद भी लोग ठीक नहीं हो रहे हैं।
हर घर में लोग बीमार : इंदरसिंह प्रजापत ने बताया कि इतने ज्यादा दस्त हो गए कि दो अस्पतालों ने मना कर दिया इलाज करने से। बाद में दूसरे अस्पताल में इलाज करवाया। मेरे घर में तीन-चार लोग बीमार पड़ गए। मेरी बहन निर्मला प्रजापत मुझसे मिलने आई तो वो भी बीमार पड़ गई। प्राची बुनकर ने पास के क्लिनिक में जाकर तीन दिन इलाज करवाया।
50 से 1 लाख लगा दिए इलाज में : लोगों ने बताया कि उल्टी दस्त के बाद इलाज में उनके 50 हजार से एक लाख रुपए तक खर्च हो गए। कुछ लोग तो इतने गरीब हैं कि इलाज भी नहीं करवा पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने दवाइयों के लिए जो टेबल्स लगाई हैं वहीं से दवा खाकर इलाज ले रहे हैं।
मेन रोड पर लगाए जांच और दवाई के सेंटर, गली में पता ही नहीं : इस पूरे अप्रिय हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भागीरथपुरा के मेन रोड पर दवाई और जांच के लिए सेंटर लगाए हैं, जहां डॉक्टर और नर्स बैठे हैं। लेकिन गली कूचों में रहने वाले लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है कि दवाई वितरण हो रहा है। निगम बस कुछ ही इलाकों में पहुंचकर अपनी खानापूर्ति कार्रवाई कर रहा है।
कहीं जहर उगल चेंबर्स तो कहीं भयंकर हुए चोक : बता दें कि पिछले कुछ दिनों से दूषित पानी सप्लास से बीमार हुए 500 से ज्यादा लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार हैं और इलाज ले रहे हैं। अब नगर निगम ने भागीरथपुरा के कुछ इलाकों में पानी के टेंकर भेजना शुरू किए हैं। पूरे इलाके में चेंबर को खोल कर जांचा जा रहा है, जहां से बेइंता गंदगी सामने आ रही हैं। कई लाइनें चोक हैं तो कहीं लीकेज की समस्याएं सामने आ रही हैं।