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ट्रंप-मोदी की 'डील' से भारत को कितनी बड़ी राहत, वेनेज़ुएला बना गेम चेंजर: क्‍या ईरान और रूस का पत्ता कटा?

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वेबदुनिया न्यूज डेस्क

, मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026 (14:30 IST)
वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक "ऐतिहासिक व्यापार समझौते" की घोषणा की है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी-भरकम  50% टैरिफ को घटाकर मात्र 18% कर दिया है। इस 32% की भारी कटौती का सीधा संबंध भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को कम करने और वेनेज़ुएला के साथ नए ऊर्जा समीकरण बनाने से है। ट्रंप ने एयरफोर्स वन से घोषणा की कि भारत के साथ इस "डील का कॉन्सेप्ट" (Concept of the Deal) अंतिम रूप ले चुका है।

1. टैरिफ का गणित: भारत को कितनी बड़ी राहत?
पिछले एक साल से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर था। ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर 'पेनल्टी' के रूप में भारत पर अतिरिक्त टैरिफ थोपे थे।
टैरिफ का प्रकार डील से पहले डील के बाद (प्रभावी तुरंत) पारस्परिक (Reciprocal) टैरिफ 25% से घटकर 18% रह गया, रूसी तेल पर दंडात्मक (Penalty) 25% अब 0%
(हटा लिया गया) कुल प्रभावी टैरिफ 50% 18%

असर: इस कटौती से भारतीय टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और ऑटो पार्ट्स सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी। ट्रंप ने "Buy American" के बदले भारत को यह छूट दी है।

2. 'वेनेज़ुएला' बना गेम चेंजर: क्यों ईरान और रूस का पत्ता कटा?
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अब भारत ईरान या रूस के बजाय अमेरिका और वेनेज़ुएला से अधिक तेल खरीदेगा।

ईरान से दूरी: भारत ने 2019 से ही ईरान से तेल लेना बंद कर दिया था। ताजा 'बजट 2026' में भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए भी कोई फंड आवंटित नहीं किया है, जो अमेरिका के प्रति रणनीतिक झुकाव को दर्शाता है।

रूस का विकल्प: भारत रूस से करीब 1.2 से 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल ले रहा था, लेकिन अमेरिकी दबाव और 50% टैरिफ की मार के बाद अब भारत वेनेज़ुएला की ओर रुख कर रहा है।

3. भारतीय रिफाइनर्स के लिए 'लॉटरी': रिलायंस और HPCL को फायदा
भारतीय रिफाइनिंग सेक्टर के लिए वेनेज़ुएला का 'हैवी क्रूड' (भारी कच्चा तेल) हमेशा से पसंदीदा रहा है।प्रोसेसिंग क्षमता: रिलायंस (Jamnagar) और HPCL जैसी रिफाइनरियों के पास भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की उन्नत तकनीक है।

डिस्काउंटेड तेल: ट्रंप प्रशासन द्वारा वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र पर नियंत्रण और मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, अमेरिका अब भारत को रियायती  दरों पर तेल उपलब्ध कराएगा।

Kpler का डेटा: मार्केट डेटा के अनुसार, भारत आने वाले महीनों में वेनेज़ुएला से 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन तक आयात बढ़ा  सकता है।

4. मोदी-रोड्रिग्ज वार्ता: नई ऊर्जा धुरी (Energy Axis)ट्रंप के एलान से ठीक पहले, 30 जनवरी 2026 को  पीएम मोदी ने वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज से बात की।

ऊर्जा सुरक्षा: दोनों देशों के बीच ऊर्जा, कृषि और निवेश पर सहमति बनी।

फंसा हुआ पैसा: भारत का करीब $500 मिलियन का लाभांश (Dividend) वेनेज़ुएला में फंसा है, जिसे तेल आयात के  बदले वसूला जा सकता है।

वैश्विक बाजार पर असर : ट्रंप का यह कदम चीन को घेरने और रूस की आय कम करने की रणनीति का हिस्सा है। भारत के लिए यह 'विन-विन' स्थिति है, क्योंकि उसे एक तरफ सस्ता तेल मिलेगा और दूसरी तरफ अमेरिकी बाजार में उसके उत्पाद प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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