अमेरिका में गिरती लोकप्रियता, चुनाव में हार के डर से ट्रंप ने दी ईरान को तबाह करने की धमकी: यशवंत सिन्हा
विश्वगुरु का दावा करने वाले भारत को युद्ध रूकवाने में निभानी चाहिए अहम भूमिका: पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा
Publish Date: Tue, 07 Apr 2026 (14:25 IST)
Updated Date: Tue, 07 Apr 2026 (14:41 IST)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर खुली धमकी दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका सिर्फ एक रात में पूरे ईरान को बर्बाद कर सकता है। ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे तक का समय दिया है। ट्रंप ने ईरान के पुल और पावर प्लांट को उड़ाने की धमकी देते हुए कहा कि इस हमले के बाद ईरान पाषाण युग में पहुंच जाएगा।
ट्रंप की इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट में छिड़े इस युद्ध से भारत भी अछूता नहीं है। वेबदुनिया ने पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा से ट्रंप की ईरान को धमकी, भारत पर युद्ध के पड़ने वाले प्रभाव और युद्ध रूकवाने मेंं भारत की क्या भूमिका हो सकती हैं, इसको लेकर खास बातचीत की।
ट्रंप की ईरान को बर्बाद करने की धमकी पागलपन-वेबदुनिया से बातचीत में यशवंत सिन्हा कहते हैं कि ट्रंप कि ईरान को एक दिन में बर्बाद कर देने की धमकी पागलपन है। ईरान की सभ्यता 6 हजार साल पुरानी है और जिसको सिंकदर, तुर्की और अन्य आततायी भी बर्बाद नहीं कर पाए और ईरान की सभ्यता जीवित रही। दरअसल ट्रंप पागल की तरह बयान दे रहे है, अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर रहे है। जो किसी भी व्यक्ति को शोभा नहीं देता है, खासकर उच्च पदों पर बैठा व्यक्ति जैसे अमेरिका का राष्ट्रपति।
यशवंत सिन्हा आगे कहते हैं कि ट्रंप ने जब युद्ध शुरु किया था तो यह सोचा था कि युद्ध दो दिन में खत्म हो जाएगा। इजरायल के साथ मिलकर वह आयुतल्ला खेमनई को मार देंगे और युद्ध खत्म हो जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ईरान तैयार था और वह बहुत मजबूती के साथ आज युद्ध शुरु होने के 35-37 दिन बाद भी बहुत मजबूती के साथ युद्ध लड़ रहा है। इसलिए ईरान अब ट्रंप की धमकियों से नहीं डर रहा है। और वह पूरी मुस्तैदी के साथ युद्ध में डटा हुआ है। ईरान ऐसा देश नहीं है जिसको कोई इतनी आसानी से बर्बाद कर पाएगा।
गिरती लोकप्रियता और चुनाव में हार से डरे ट्रंप- पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा आगे कहते है कि मैं उम्मीद करता हूं कि ट्रंप किसी दिन यह कहेंगे कि हम जीत गए और युद्ध को रोक देंगे क्योंकि अमेरिका में इस युद्ध का जबरदस्त विरोध हो रहा है और ट्रंप का रेंटिग लगातार नीचे गिरती जा रही है और यह आने वाले दिनों में और नीचे गिरेगी। इसके साथ ही नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने है और जिसका सामना ट्रंप की पार्टी को करना होगा। और उसमें अगर ट्रंप की पार्टी की हार हुई तो उसके बाद अमेरिका में जो कहावत है कि लेम डक प्रेसिडेंट हो जाएंगे, इसके बाद भले ही 2 साल का कार्यकाल बचा रहे लेकिन ट्रंप की चलेगी नहीं।
युद्ध में भारत की खमोशी,विश्वगुरु होने पर सवालिया निशान–मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण युद्ध का असर भारत पर भी पड़ा रहा है। बातचीत में यशवंत सिन्हा कहते हैं कि विदेश नीति के मामले में भारत की 1947 से यह भूमिका रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब भी कोई युद्ध या संघर्ष होता है तो भारत उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए उसको हल निकालने की कोशिश करता है। कभी अकेले कभी दूसरे देशों के साथ मिलकर। लेकिन यह पहली बार हो रहा है कि हमारे बगल में युद्ध हो रहा है लेकिन भारत इतने दिनों से एकदम खमोश बैठा हुआ है।
वह आगे कहते है कि अमेरिका भी हमारा मित्र है, इजरायल भी भी हमारा मित्र है और ईरान भी हमारा मित्र है जब तीनों हमारे मित्र है तो हमारा यह कर्तव्य बनता है कि युद्ध को रूकवाया जाए। खासकर ऐसे समय पर जब हमारी अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हो रहा है। पहले यह हो रहा था कि हमारे अर्थव्यवस्था इस साल 7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी लेकिन अब मूडीज ने अपने अनुमान में इसे घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है, यानि कम से कम 1 प्रतिशत का घाटा। अगर युद्ध और चला तो और भी घटा हो गया और यह दर और नीचे जाएगी। हर दृष्टिकोण से यह युद्ध हमारे लिए किसी भी प्रकार से पायेदमंद नहीं है। भारत के अपने स्वार्थ में भी है कि हम लोग इसे रूकवाने का पूरा प्रयास करें। अब भारत सरकार क्यों नहीं कर रही, मुझे नहीं पता। लेकिन भारत सरकार को ऐसा करना चाहिए था।
यशवंत सिन्हा इसके साथ कहते है कि जब मैं विदेश मंत्री था तब भारत की पहल पर एक तीन देशों का समूह बनाया गया था, उसमें दक्षिण अमेरिका का देश ब्राजील,अफ्रीका का देश दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। तीन महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करते हुए यह संस्था बनाई थी इसके पीछे उद्देश यह था कि अगर दुनिया में ऐसा कुछ होता है जो ठीक नहीं है तो उसमें तीनों देश मिलकर हस्तक्षेप करेंगे और समाधान करेंगे। आज उस संस्था का उपयोग भी भारत नहीं कर रहा है। भारत का खमोश रहना मैं मानता हूं कि गलत है, खासकर जब हम विश्वगुरु होने का दावा करते हैं।
वह कहते है कि आने वाले समय में भारत के सामने आर्थिक, विदेश नीति और विश्व में शांति के मोर्चे पर चुनौती है। सबसे बड़ी बात यह है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ का निर्माण हुआ था इस तरह के संघर्ष को रोकने के लिए। अब वह पूरी तरह फेल हो गया है। अब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप एक नया विश्व ऑर्डर बन रहा है, विश्व की व्यवस्था लागू कर रहे जिसमें केवल उनकी दादागिरी चलेगी। जो सहीं नहीं है,भारत को इसका विरोध करना चाहिए।