संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सोमवार को भारत के करीब साढ़े तीन घंटे के दौरे के लिए आए। यात्रा में भारत और यूएई के बीच रक्षा, ऊर्जा, निवेश और वैश्विक हालात को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों और आशय पत्रों पर सहमति बनी। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे और राष्ट्रपति अल नाहयान के साथ प्रधानमंत्री आवास तक गए, जहां औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की बैठकें हुईं। राष्ट्रपति के दौरे ने पाकिस्तान की टेंशन को बढ़ा दिया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के बुलावे पर, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 19 जनवरी 2026 को भारत का आधिकारिक दौरा किया। इस आधिकारिक दौरे के नतीजों की लिस्ट में LoIs/MoUs/समझौते/घोषणाएं शामिल हैं।
10 सालों में 5वीं यात्रा थी
पिछले 10 सालों में महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यह भारत की 5वीं यात्रा थी और UAE के राष्ट्रपति के तौर पर यह उनकी तीसरी आधिकारिक यात्रा थी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। वे इस बात पर सहमत हुए कि पिछले एक दशक में भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मज़बूत हुई है। दोनों नेताओं ने पिछले 2 सालों में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, महामहिम शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस, उप प्रधान मंत्री और UAE के रक्षा मंत्री, महामहिम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की भारत यात्राओं का स्वागत किया और कहा कि इन यात्राओं से द्विपक्षीय संबंधों में पीढ़ीगत निरंतरता बनी रही है।
दोनों देशों में व्यापार 200 बिलियन ले जाने का लक्ष्य
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि व्यापार के मोर्चे पर, 2022 में दोनों देशों के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर साइन होने के बाद से, द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। इसे देखते हुए, दोनों नेताओं ने लक्ष्य को बढ़ाने और 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर करने का फैसला किया। यह भी तय किया गया कि MSME उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरेशियाई क्षेत्रों में आसान बनाया जाएगा।
धोलेरा में स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन
निवेश के मोर्चे पर गुजरात के धोलेरा में यूएई की भागीदारी से एक स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन विकसित करने पर सहमति बनी। परियोजना के तहत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, ग्रीनफील्ड पोर्ट, स्मार्ट सिटी, रेलवे कनेक्टिविटी, ऊर्जा परियोजनाएं और एविएशन ट्रेनिंग से जुड़े ढांचे पर ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच एक बड़ी साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा फैसला
ऊर्जा क्षेत्र में भी अहम फैसला हुआ। यूएई हर साल भारत को पांच लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति करेगा। इसके साथ ही भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम और यूएई की ADNOC गैस के बीच गैस आपूर्ति को लेकर समझौता हुआ। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर आपूर्ति मिलेगी।
रक्षा और स्पेस सेक्टर में समझौते
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी के मुताबिक इस मुलाकात में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर फोकस रहा। रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए। इससे भविष्य में रक्षा सहयोग को एक ठोस ढांचे में आगे बढ़ाया जा सकेगा. स्पेस सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत और यूएई की संबंधित एजेंसियों के बीच स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और उसके व्यावसायिक उपयोग को लेकर समझ बनी है। इसके तहत सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च सुविधाओं, संयुक्त मिशन, ट्रेनिंग सेंटर और स्पेस एकेडमी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma