बरेली मंडल के मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच पूरी होने तक अलंकार अग्निहोत्री को शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
क्या है मामला
गौरतलब है कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यूजीसी बिल और शंकराचार्य के साथ हुई घटना के विरोध में यह कदम उठाया है। इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें जिलाधिकारी आवास पर बातचीत के बहाने बुलाया गया और वहां कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर होने पर उन्होंने तत्काल एक वरिष्ठ सचिव को फोन कर जानकारी दी कि उन्हें जबरन रोका गया है। राज्य सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
क्या लिखा है इस्तीफे में
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया है। साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होने का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं।
edited by : Nrapendra Gupta