Publish Date: Tue, 02 Jun 2026 (11:48 IST)
Updated Date: Tue, 02 Jun 2026 (11:57 IST)
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की ओर से बिजली बिल में 10 फीसदी ईंधन अधिभार लगाए जाने संबंधी फैसले को गैर कानूनी करार दिया। आयोग ने इस मामले में 7 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। बहरहाल इस फैसले के बाद ईंधन अधिभार के रूप में 10 फीसदी की वसूली नहीं की जा सकेगी।
विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस अतिरिक्त वसूली को नियमों के विरुद्ध बताते हुए नियामक आयोग में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि ईंधन अधिभार के नाम पर कॉर्पोरेशन ने मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ-साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाए दावों और पहले की देनदारियों को भी जोड़ दिया है। यह आयोग के नियमों के विपरीत है।
मामले की सुनवाई करते हुए विद्युत नियामक आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस जारी कर 7 दिन में विस्तृत स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। साथ ही वर्तमान व पहले की बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क का विवरण देने का भी आदेश दिया है। साथ ही यूपीपीसीएल को निर्देश दिया है कि अंतिम फैसला आने तक बिलों में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं जोड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने जून 2026 के बिजली बिलों में 10 फीसदी ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) शुल्क वसूलने का फैसला किया था। फ्यूल सरचार्ज लगने के बाद उपभोक्ताओं को अब 100 रुपए के बिल पर 110 रुपए देने होते।
बहरहाल उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के इस फैसले से पहले ही महंगाई से परेशान उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है और उन पर पड़ने वाला बड़ा आर्थिक बोझ फिलहाल टल गया है।
edited by : Nrapendra Gupta
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