अमेरिका का भारत को झटका, सोलर आयात पर लगाया 126% टैरिफ
क्या है प्रारंभिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी और कब से हो सकती है लागू
Publish Date: Wed, 25 Feb 2026 (15:07 IST)
Updated Date: Wed, 25 Feb 2026 (15:13 IST)
US India Solar Tariff: अमेरिका ने भारत को एक और झटका दे दिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल्स और मॉड्यूल पर 125.87% (लगभग 126%) का प्रारंभिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) यानी प्रतिसंतुलन शुल्क लगा दिया है।
अंतिम फैसला कब?
यह कदम अमेरिकी घरेलू निर्माताओं को उन विदेशी उत्पादों से बचाने के लिए उठाया गया है, जिन्हें उनकी सरकारों से भारी सब्सिडी मिलती है और जो अमेरिकी बाजार में कम कीमतों पर बेचे जाते हैं। हालांकि यह अभी एक प्रारंभिक (Preliminary) निर्णय है। इन शुल्कों पर अंतिम फैसला 6 जुलाई, 2026 तक आने की उम्मीद है।
भारतीय सोलर कंपनियों पर होगा असर
विश्लेषकों का मानना है कि इतनी अधिक ड्यूटी के बाद भारतीय सोलर कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में टिकना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। वारी एनर्जीज (Waaree Energies) और प्रीमियर एनर्जीज जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी इसका असर देखा गया है। अमेरिका ने भारत पर 125.87 प्रतिशत,
इंडोनेशिया पर 86 से 143 प्रतिशत और लाओस पर 81 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
चूंकि अमेरिका अपनी जरूरत का लगभग 57% सोलर आयात इन्हीं तीन देशों से कर रहा था, इसलिए वहां सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है और काम में देरी हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए कई भारतीय कंपनियां अब सीधे अमेरिका में ही अपनी फैक्ट्री लगाने की योजना बना रही हैं ताकि वे वहां के स्थानीय नियमों और सब्सिडी (IRA) का लाभ उठा सकें।
क्या है प्रारंभिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी?
Preliminary Countervailing Duty-CVD को हिंदी में 'प्रारंभिक प्रतिसंतुलन शुल्क' कहा जाता है। दरअसल, जब कोई देश (जैसे भारत) अपने निर्यातकों को सब्सिडी (सरकारी आर्थिक मदद) देता है, तो वे कंपनियां अपने उत्पाद को दूसरे देश (जैसे अमेरिका) में बहुत कम कीमत पर बेच पाती हैं। इससे अमेरिका की अपनी कंपनियों को नुकसान होता है। इस 'अनुचित लाभ' को खत्म करने के लिए आयात करने वाला देश जो अतिरिक्त टैक्स लगाता है, उसे काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) कहते हैं।
तात्कालिक रोक : जैसे ही यह ड्यूटी घोषित होती है, आयातकों को सीमा शुल्क पर यह पैसा जमा करना या बॉन्ड भरना शुरू करना पड़ता है। यह अभी अस्थायी फैसला है। इसके बाद मामले की और गहराई से जांच होगी। कुछ महीनों बाद (इस मामले में जुलाई 2026 तक) अंतिम फैसला आएगा। अगर जांच में पता चला कि सब्सिडी कम थी, तो फालतू पैसा वापस मिल सकता है, और अगर सब्सिडी सही पाई गई, तो यह ड्यूटी स्थायी हो जाएगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala