uttarakhand tourist places to avoide in monsoon : उत्तराखंड का उत्तरकाशी जिला गंगोत्री धाम का प्रवेश द्वार है। भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं के लिए बेहद संवेदनशील रहा है। हाल ही में, धराली गाँव के पास हर्षिल घाटी में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई घर और दुकानें जमींदोज हो गई हैं, और सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। खीर गाड़ नदी का जलस्तर बढ़ने से मलबा तेजी से बहकर आया, जिससे यह क्षेत्र इस समय यात्रा के लिए अत्यंत खतरनाक हो गया है। कई लोग बारिश के इस सुहाने मौसम में उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों का ट्रिप प्लान करते हैं लेकिन अभी के हालात को देखते हुए कुछ जगहों पर जाने से बचना चाहिए।
धराली गांव के पास हर्षिल वैली: हर्षिल वैली लगभग 2745 मी की ऊंचाई पर स्थित है। धराली गांव से हर्षिल वैली लगभग 7 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने में आपको लगभग 20 मिनट का समय लगेगा। यह जगह प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती है। गंगोत्री दर्शन के लिए जाने वाले लोग, यहां घूमकर जाना पसंद करते हैं। बारिश के मौसम में छोटे बच्चों के साथ जाने से आपको बचना चाहिए।
जोशीमठ:
चमोली जिले में स्थित जोशीमठ, जो बद्रीनाथ धाम का शीतकालीन गद्दी स्थल है, पिछले कुछ समय से गंभीर भूधंसाव (Land Subsidence) की समस्या से जूझ रहा है। यहाँ सैकड़ों घरों और सड़कों में बड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे कई परिवारों को विस्थापित करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शहर एक प्राचीन भूस्खलन क्षेत्र पर बसा है और अनियोजित निर्माण तथा जल निकासी की खराब व्यवस्था ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। जोशीमठ में अभी भी स्थिति अस्थिर बनी हुई है, और किसी भी समय बड़े खतरे की आशंका बनी रहती है।
चमोली और रुद्रप्रयाग:
चमोली और रुद्रप्रयाग जिले, जहाँ चार धाम यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव स्थित हैं, भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। इसरो (ISRO) की रिपोर्ट के अनुसार, रुद्रप्रयाग देश में भूस्खलन के लिए सबसे अधिक संवेदनशील जिलों में से एक है, और चमोली भी शीर्ष 20 में शामिल है। भारी बारिश के दौरान इन जिलों में अक्सर भूस्खलन होते हैं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो जाती हैं और यात्रा बाधित होती है। हाल ही में रुद्रप्रयाग में सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में हुए भूस्खलन से केदारनाथ यात्रा भी अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ी है। मंदाकिनी और अलकनंदा नदियों का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का विषय है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग
केदारनाथ धाम की यात्रा, जो रुद्रप्रयाग जिले से होकर गुजरती है, भारी बारिश और भूस्खलन के कारण अक्सर बाधित होती रहती है। गौरीकुंड और सोनप्रयाग के बीच का मार्ग विशेष रूप से संवेदनशील है। हाल ही में सरस्वती और मंदाकिनी नदियों के विकराल रूप ने भी यात्रा को प्रभावित किया है। प्रशासन लगातार मौसम और मार्ग की स्थिति पर नजर रख रहा है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवाजाही को अस्थायी रूप से रोक रहा है।
यात्रा की योजना बनाते समय क्या करें?
यदि आप उत्तराखंड की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अत्यधिक सावधानी बरतें:
•
मौसम की जानकारी: यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान मौसम विभाग की चेतावनी और पूर्वानुमान की लगातार जाँच करें।
•
सड़क की स्थिति: स्थानीय प्रशासन या पर्यटन विभाग से सड़कों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी लें। कई सड़कें भूस्खलन के कारण बंद हो सकती हैं।
•
अनावश्यक यात्रा से बचें: यदि मौसम खराब हो या किसी क्षेत्र में आपदा का खतरा हो, तो अनावश्यक यात्रा से बचें।
•
पंजीकरण: चार धाम यात्रा जैसी तीर्थयात्राओं के लिए आवश्यक पंजीकरण अवश्य कराएं और सभी दिशानिर्देशों का पालन करें।
•
हल्का सामान और आपातकालीन किट: यात्रा के दौरान हल्का सामान ले जाएं और एक आपातकालीन किट (प्राथमिक उपचार, सूखे मेवे, पानी, टॉर्च आदि) साथ रखें।