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क्या होगा यदि ममता मुख्‍यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी? राज्यपाल के पास हैं ये खास अधिकार

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Mamata Banerjee Resignation Controversy
Mamata Banerjee Resignation Controversy: स्वतंत्र भारत में यह पहला अवसर है, जब किसी मुख्‍यमंत्री ने चुनाव हारने के बाद कहा है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। दरअसल, पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने यह घोषणा (मैं इस्तीफा नहीं दूंगी) करके एक लोकतांत्रिक संकट खड़ा कर दिया है। हालांकि इसमें भी कोई दोराय नहीं कि उन्हें पद छोड़ना ही होगा क्योंकि वे चुनाव हार चुकी हैं और विधानसभा में उनके पास बहुमत का आंकड़ा भी नहीं है। 
 
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है और राज्य में नई सरकार का शपथ समारोह 9 मई को होगा। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलकर धांधली करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इंकार किया है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल गूंज रहा है कि यदि मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो ऐसी स्थिति में क्या होगा? 

क्या कर सकते हैं राज्यपाल?

संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और मंत्रिपरिषद राज्यपाल के 'प्रसादपर्यंत' पद पर बनी रहती है। यदि चुनाव हारने के बाद बहुमत वाली पार्टी सरकार बनाने का दावा पेश करती है, तो राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने के लिए कह सकते हैं। अगर वे इनकार करती हैं, तो राज्यपाल उन्हें बर्खास्त करने का संवैधानिक अधिकार रखते हैं।
 
राज्यपाल चुनाव जीतने वाली पार्टी के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं और शपथ दिला सकते हैं। विधानसभा का कार्यकाल निश्चित होता है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही सरकार का कानूनी अस्तित्व स्वतः ही संकट में आ जाता है। यदि मुख्यमंत्री बहुमत खो चुकी हैं, तो वे सदन का विश्वास खो चुकी मानी जाती हैं।

राष्ट्रपति शासन भी संभव

यदि कोई तकनीकी पेंच फंसता है, तो राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकते हैं। अगर ममता बनर्जी सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें पद छोड़ना ही होगा। आमतौर पर, जब एक मुख्यमंत्री हार जाता है, तो वह इस्तीफा देता है और राज्यपाल उसे नया मुख्यमंत्री चुने जाने तक 'कार्यवाहक मुख्यमंत्री' के रूप में बने रहने को कहते हैं।
 
यदि मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पूरी तरह इनकार करते हैं, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। इस गतिरोध के समाधान के लिए मामला अदालत में जा सकता है, जहां संविधान के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने ‘द टेलीग्राफ ऑनलाइन’ को बताया कि ऐसी दुर्लभ स्थिति में राज्यपाल मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं और यदि वे नहीं मानतीं, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं। इस स्थिति में राष्ट्रपति शासन सबसे संभावित विकल्प है, चाहे फिर वह एक दिन के लिए ही क्यों न हो। 
 
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील फर्नांडीस कहते हैं कि इस्तीफे का विरोध करके वे केवल संवैधानिक अराजकता को बढ़ावा देंगी। कलकत्ता हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत नारायण चटर्जी ने कहा कि आजादी के बाद से ऐसा कभी नहीं हुआ। किसी मुख्यमंत्री ने पद छोड़ने से इनकार नहीं किया। संविधान कहता है कि कोई भी मुख्यमंत्री तभी तक पद पर बना रह सकता है, जब तक विधानसभा का विश्वास प्राप्त हो।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 

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