जोधपुर जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 'इको-रिस्पॉन्सिव' आर्किटेक्चर के प्रयोग के लिए थर्मामीटर मांगा है। उनकी पत्नी गीतांजलि ने बताया कि वांगचुक बैरक में चींटियों के व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं।
जेल को ही बना लिया प्रयोगशाला
सोनम वांगचुक का नया मिशन, लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने जेल की दीवारों के पीछे भी अपना 'वैज्ञानिक' काम जारी रखा है। 110 दिनों से अधिक समय से एकांत कारावास में बंद वांगचुक अब जेल की बैरकों को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
चींटियों के अनुशासन से सीख रहे हैं टीम भावना
वांगचुक की पत्नी और HIAL की सह-संस्थापक गीतांजलि जे. आंग्मो ने सोशल मीडिया पर उनकी स्थिति साझा की: वांगचुक जेल में 'Ants: Workers of the World' जैसी किताबें पढ़ रहे हैं। वे अपनी बैरक में चींटियों के व्यवहार और उनकी एकजुटता का बारीकी से अवलोकन (Observation) कर रहे हैं। उनका मानना है कि चींटियों से टीम भावना और समुदाय के लिए काम करना सीखा जा सकता है।
प्रशासन से मांगा थर्मामीटर, क्यों है इसकी जरूरत?
वांगचुक ने जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट से थर्मामीटर जैसे बुनियादी उपकरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य है:
इको-रिस्पॉन्सिव वास्तुकला: जेल की बैरकों के तापमान और पर्यावरण का विश्लेषण करना।
सुधार के प्रयोग: ऐसे सरल प्रयोग करना जिससे जेल की कोठरियों को पर्यावरण के अनुकूल और रहने लायक बनाया जा सके।
रिहाई की मांग और कानूनी स्थिति
गीतांजलि आंग्मो ने उनकी रिहाई की अपील करते हुए कहा कि वांगचुक को राष्ट्र-निर्माण और शिक्षा के कार्यों के लिए बाहर होना चाहिए। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका: उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। उल्लेखनीय है कि वांगचुक को बीते साल 26 सितंबर को एनएसए (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।
Edited By: Navin Rangiyal