भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक अहम फैसला संसद में हो गया है। गुरुवार को संसद ने द सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फोर ट्रांसफोर्मिंग इंडिया बिल यानी SHANTI विधेयक को मंजूरी दे दी, जिससे अब इस क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी संभव हो सकेगी। यह क्षेत्र अब तक पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था। सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल को पहले लोकसभा में बुधवार को पारित किया गया था और गुरुवार को राज्यसभा ने भी इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
क्या है विधेयक में बदलाव
मोदी सरकार की ओर से लाया गया द सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फोर ट्रांसफोर्मिंग इंडिया बिल, 2025 यानी शांति विधेयक, 2025 परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, उपयोग और रेगुलेशन के लिए एक पूरी तरह से नया ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके साथ इस बिल में रेडिएशन के मानकों को लेकर कई नए नियमों को शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने इस बिल को लेकर कहा कि परमाणु ऊर्जा तकनीक देश में स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है
चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सरकार से तीखा सवाल पूछा। उन्होंने बिल पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि साल 2008 में भारत और अमेरिका के बीच एक परमाणु करार हुआ था। इसका विरोध सबसे ज्यादा भाजपा ने ही किया था।
कांग्रेस ने इसे लेकर एक्स पर जानकारी भी दी। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार को आगाह किया कि परमाणु क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों की कीमत पर निजी कंपनियों को बढ़ावा देना राष्ट्रीय हित में नहीं है। उन्होंने फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परमाणु ऊर्जा पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में है। Edited by : Sudhir Sharma